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मां ने कहा- शहर घुमाने के बहाने बेटी को जेल ले गई थी ननद
बगैर जुर्म के 72 दिन जेल में रही 6 साल की कृष्णा मां को देख लिपट पड़ी
सिटीरिपोर्टर|खंडवा
बगैरजुर्म के 72 दिन जेल में रही छह साल की मासूम कृष्णा मंगलवार को अपने माता-पिता से मिली। मां को देखते ही कृष्णा दौड़ लगाकर उनसे लिपट पड़ी। दोनों की आंखों में खूशी के आंसू थे। आंसू पोंछते हुए मां बोली- आरोपी ननद मिसराबाई (कृष्णा की बुआ) उसे शहर घुमाने के बहाने ले गई थी। यहां कोर्ट में खुद की बेटी बता दिया। बुआ के झूठ की सजा बेटी को भुगतना पड़ी।
मंगलवार को बाल कल्याण समिति ने कृष्णा को उसके पिता मदन, मां ललिता को सौंप दिया। जेल में निरीक्षण के दौरान मासूम की कहानी सुनकर न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने उसे बाहर निकलवाकर बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किया था। 4 फरवरी को कृष्णा बाल कल्याण समिति को सौंपी गई। आरोपी मिसराबाई के बार-बार झूठ बोलने से पुलिस चाइल्ड लाइन को उसके परिजनों को तलाशने में कई दिन लग गए। मंगलवार को न्यायालय में वकीलों द्वारा कार्य करने से कृष्णा को माता-पिता के सुपुर्द करने की कार्रवाई नहीं हो सकी।
बेटी को गले लगाते ही मां ललिता की आंखें भर आई।
रायसेन में मिले परिजन
चाइल्डलाइन संचालक राजेश शुक्ला ने बताया बच्ची के पिता मदन पिता सकरिया को तलाशने के लिए दो लोग झाबुआ जिले के फलियागांव पिथौड़ा पहुंचे थे। झाबुआ पुलिस ने भी परिजनों की गांव में तलाश की। पुलिस के डर से मदन का पिता शंकर उर्फ सकरिया फरार हो गया। कुछ लोगों से पता चला मदन रायसेन में परिवार सहित मजदूरी करता है। गांव में ही मदन का मोबाइल नंबर भी मिल गया। फोन पर सूचना के बाद परिजन खंडवा पहुंचे।
परिजनों को रुपए वापस दिलवाएंगे न्यायाधीश
कृष्णाको छुड़ाने के लिए कोर्ट के ही वकील ने परिजनों से 15 हजार रुपए लिए। जमानत तो नहीं मिली लेकिन उसे जेल हो गई। जज श्री दुबे ने बताया वकील के झूठ की सजा मासूम को भुगतना पड़ी। परिजनों को रुपए वापस दिलवाए जाएंगे।