हेराफेरी के सवालों को टाल गए कमांडेंट
मीटरगेजरेलवे ट्रैक के लकड़ी के स्लीपर बेचने के मामले को अब रेलवे अधिकारी दबाने का प्रयास कर रहे हैं। हेराफेरी की जांच करने बुधवार को खंडवा पहुंचे आरपीएफ कमांडेंट नांदेड डिवीजन मो.इश्तियाक तो मामले की जानकारी से पल्ला झाड़ते हुए भाग खड़े हुए।
मीटरगेज रेलवे ट्रैक लकड़ी के स्लीपर बेचने के मामले के नाटकीय घटनाक्रम में बुधवार को नया मोड़ आया। आरपीएफ सब-इंस्पेक्टर द्वारा सीनियर सेक्शन इंजीनियर को पकड़े जाने की खबर से नांदेड, अकोला से लेकर सिकंदराबाद तक हड़कंप मच गई। सीनियर सेक्शन इंजीनियर कौशिक कुमार के बचाव के लिए अकोला से एडीईएन चंद्रमोहन रेड्डी मंगलवार देररात खंडवा पहुंचे। सब-इंस्पेक्टर एनपी सिंह की ओर से खुद आरपीएफ कमांडेंट मो.इश्तियाक ने मोर्चा संभालते हुए बुधवार दोपहर खंडवा आए। इससे पहले नांदेड डिवीजन क्राइम ब्रांच की टीम टीआई बीके मीणा और आरएस मलदोडे के नेतृत्व में सुबह खंडवा पहुंची। टीम ने मामले के मुख्य संदिग्ध आरोपी सीनियर सेक्शन इंजीनियर कौशिक कुमार एवं एसआई एनपी सिंह से पूछताछ की। सागौन के स्लीपर बेचने के मामले में जांच हुई तो करोड़ों रुपए की हेराफेरी उजागर होगी। जांच को दबाने के लिए आरपीएफ और इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारी जुट गए। दो दिन से चल रही जांच में बुधवार को भी किसी के खिलाफ मामला दर्ज नहीं हुआ। इधर, सेक्शन इंजीनियर के परिजन की शिकायत को कोतवाली पुलिस ने रेलवे का निजी मामला होने की बात कह आरपीएफ थाने जाने की सलाह दी।
^लकड़ीके स्लीपर बेचने के मामले में सीनियर सेक्शन इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध है। मामले की जांच कर रहे हैं। -मो.इश्तियाक, कमांडेंट, आरपीएफ, नांदेड डिवीजन
^लकड़ीके स्लीपर बेचने के मामले में सीनियर सेक्शन इंजीनियर बेकसूर है। आरपीएफ को अधिकार नहीं अधिकारी से पूछताछ की। -चंद्रमोहनरेड्डी, एडीईएन, अकोला
आरपीएफ कमांडेंट मो. इश्तियाक चर्चा करते हुए। पीछे बाएं से पहले स्थान पर खडे है सब-इंस्पेक्टर एनपी सिंह।