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स्कूलों की बदइंतजामी में गुमी ‘मीना की दुनिया’

6 वर्ष पहले
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रेडियोसंवाद कार्यक्रम झिलमिल और मीना की दुनिया सरकारी स्कूलों की अव्यवस्था और कुप्रबंधन में गुम हो गए। गांवों की बात तो दूर जिला मुख्यालय के स्कूलों में ही रेडियो संवाद नहीं हो रहा है।

भास्कर टीम जब स्कूलों में पहुंची तो कहीं रेडियो नहीं मिले तो कहीं शिक्षक-विद्यार्थियों को पता ही नहीं कि कार्यक्रम सुनना था। शासकीय सरोजिनी नायडू माध्यमिक कन्या विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक की छात्राओं को रेडियो संवाद की जानकारी नहीं थी। रेडियो की जानकारी मांगी तो शिक्षिकाएं टालती रहीं। नीलकंठेश्वर माध्यमिक विद्यालय में भी यही स्थिति थी। यहां पर शिक्षिकाएं दोपहर 2.50 बजे कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को रेडियो पर संवाद सुनाने के बजाय अन्य विषय पढ़ा रहीं थीं। शिक्षक- शिक्षिकाओं को इसकी जानकारी भी नहीं थी। राज्य शिक्षा केंद्र की ओर से 4 फरवरी को प्रदेशभर के जिला शिक्षा केंद्रों को 10 फरवरी से जिले के सभी प्राथमिक माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों की शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए रेडियो पर संवाद सुनाने के निर्देश दिए। निर्देश दूसरे ही दिन से हवा हो गए। इक्का-दुक्का स्कूलों को छोड़कर किसी भी स्कूल में बच्चों को रेडियो पर संवाद नहीं सुनाए जा रहे।

कक्षा1 से 8 तक का रेडियो शेड्यूल

कक्षा1 से 2 के लिए दोपहर 12 से 12.30 बजे तक अंग्रेजी-1, कक्षा 3 से 4 के लिए 12.30 से 1 बजे तक अंग्रेजी लेवल-2, कक्षा 3 से 5 के लिए झिलमिल कार्यक्रम दोपहर 12.30 से दोपहर 1 बजे कक्षा 6 से 8 तक के लिए दोपहर 2.45 से 3.00 बजे तक संवाद मीना की दुनिया का रेडियो पर प्रसारण हर स्कूल में कराना अनिवार्य है।

सरोजनी नायडू स्कूल में तो रेडियो था बच्चों को संवाद की जानकारी।

^सभी स्कूलों में प्रतिदिन संवाद होना चाहिए। निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो वहां के प्रधान पाठकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। -राजेश भंगाले, विकासखंड स्रोत समन्वयक

रेडियो से टूटा संवाद