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फर्जी गेट पास से ठिकाने लगाए थे लकड़ी के स्लीपर

6 वर्ष पहले
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रेलवे के स्लीपर बेचने के मामले में आरपीएफ-सेक्शन इंजीनियर आमने-सामने

सिटीरिपोर्टर|खंडवा

मीटरगेजरेलवे ट्रैक के लकड़ी के स्लीपर फर्जी गेटपास से पार किए थे। आरपीएफ की टीम रेल सम्पत्ति को गैरकानूनी तरीके से बेचे जाने के मामले की दो दिन से जांच कर रही है। जांच में आरपीएफ के हाथ लकड़ी के स्लीपर फर्जी गेटपास पर बाहर भेजे जाने के सबूत लगे। गुरुवार दोपहर आरपीएफ क्राइम ब्रांच नांदेड डिवीजन टीआई बीके मीणा ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर कौशिक कुमार से डिपो के रिकार्ड की प्रमाणित कॉपी मांगी। जिसे दिखाने से इंजीनियर कौशिक कुमार ने इनकार किया। दो घंटे तक क्राइम ब्रांच टीआई मीणा और इंजीनियर कुमार के बीच चर्चा चली। इंजीनियर कुमार गुरुवार रात 10 बजे सीनियर डिवीजनल इंजीनियर नांदेड रजनीश सरोज के आने पर रिकार्ड दिखाने पर सहमत हुए। अकोला के एडीईएन केवीपी चंद्रमोहन रेड्डी एवं आरपीएफ कमांडेंट मो.इश्तियाक गुरुवार को रेलवे रेस्ट हाउस में ही डटे रहे। दोनों ही अधिकारी अपने अधीनस्थ को बचाने के लिए नांदेड और सिकंदराबाद कार्यालय में संपर्क करते रहे।

40 टन से ज्यादा लकड़ी के स्लीपर बेचने का अंदेशा

सूत्रोंकी मानें तो 40 टन से ज्यादा लकड़ी के स्लीपर बेचे जाने का अंदेशा है। रेलवे ट्रैक में मजबूती के लिए सागौन की लकड़ी के स्लीपर का उपयोग होता है। बाजार में सागौन की लकड़ी के स्लीपर का भाव 800 से 1000 रुपए घनफीट है। रेलवे ने 4, 6, 7 और 10 फीट लंबाई और 2 से 4 फीट चौड़ाई के स्लीपर बदले थे। अधिकारी डिपो के रिकार्ड बताने से कतराते रहे।

आरपीएफएसआई को भेजा मानहानि का नोटिस

सीनियरसेक्शन इंजीनियर कौशिक कुमार ने आरपीएफ एसआई एनपी सिंह को मानहानि का नोटिस भेजा। इंजीनियर कुमार ने बताया अधिवक्ता दिलीप श्रीमाली के माध्यम से भेजे नोटिस में पांच लाख रुपए की क्षतिपूर्ति का दावा किया है। आरपीएफ एसआई एनपी सिंह पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसपी और सीएसपी को आवेदन देने जा रहा हूं।

इंजीनियर कौशिक से जानकारी लेने उनके कार्यालय में पहुंचे आरपीएफ क्राइम ब्रांच टीआई मीणा।