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प्रताड़ना से सिहर उठी बहन-बेटियां

7 वर्ष पहले
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खंडवा| कोई 8 दशक पहले कवयित्री महादेवी वर्मा ने नारी का परिचय जिन शब्दों में दिया था, उसमें इतने बरस बाद भी कोई खास बदलाव दिखाई नहीं देता। हमारी बहन-बेटियां घर से लेकर गांव और समाज तक हर मुकाम पर प्रताड़ित की जा रही हैं। मंगलवार को इनकी प्रताड़ना के तीन वाकये सामने आए। गैंगरेप के बाद बच्चों की खातिर पति को माफ कर चैन से जिंदगी गुजर करने की कोशिश कर रही पीड़िता को समाज के लोगों ने इतने ताने दिए कि उसे अब पति से तलाक के लिए हलफनामा पेश करने पर मजबूर होना पड़ा। दर-दर की ठोकरे खा रही दुष्कर्म की शिकार नेशनल खिलाड़ी को सहारा मिला तो अफसरों को रास नहीं आया। अब अफसर उसे बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं। नौ साल की मासूम बच्ची ने जब सिसकियां भरते हुए कहा- घर नहीं जाऊंगी, पापा बेल्ट से मारते हैं, तो सुनने वालों की आंखों में आंसू भर आए।
उपेक्षा :- नेशनल खिलाड़ी से दुष्कर्म मामला : महिला अफसर को रास नहीं आया आसरा
एक माह से फुटपाथ पर रह रही मार्शल आर्ट की ब्लैक बेल्ट खिलाड़ी को जब आश्रय मिला तो उससे मिलने वालों की मंगलवार को भीड़ लग गई। हरसूद रोड स्थित बाल सखा पर मिलने वालों में महिला सशक्तिकरण अधिकारी रीता नाथ भी पहुंची। उम्मीद थी कि वे महिला होने के नाते महिला का दर्द बेहतर समझेंगी। अधिकारी ने युवती से पूछा आप यहां पर कैसे आई? जैसे उन्हें पता ही नहीं कि युवती के साथ क्या घटना हुई। अधिकारी ने कहा अखबार में खबर छपने से तुम्हारे मां-बाप की बदनामी हुई है। कोर्ट में केस चल रहा था वहां से न्याय मिल जाता। महिला सशक्तिकरण अधिकारी के साथ डीएसपी सुनीता रावत और महिला सशक्तिकरण विभाग के कर्मचारी भी थे।
मासूम बच्ची के साथ मारपीट, मैं घर नहीं जाऊंगी, पापा बेल्ट से मारते हैं
नई मां अपने बेटे से ज्यादा प्यार करतीं है, मुझसे नहीं। मैं वहां नहीं जाऊंगी। पापा बेल्ट से मारते हैं। पुलिस अंकल आप मेरी मम्मी से बात करा दोगे। मुझे नाना-नानी के पास जाना है। 9 साल की मासूम संस्कृति गजेंद्र चौहान ने नेपानगर स्टेशन पर यह मिन्नतें आरपीएफ स्टाफ से की। मंगलवार दोपहर ये मासूम नेपानगर स्टेशन पर लावारिस घूम रही थी। पुलिस उसे खंडवा लेकर आई तो यहां उसने असलियत बयां की। बालिका ने अफसरों को बताया मम्मी-पापा का तलाक हो गया। पहले वह मम्मी वैशाली के पास जलगांव में रहती थी। फिर यहां से पापा मुझे नेपानगर ले आए। पुलिस ने बालिका को चाइल्ड लाइन के सुपुर्द कर दिया। सूचना मिलते ही संस्कृति के मामा चाइल्ड लाइन पहुंचे। यहां संस्कृति को मामा के साथ भेज दिया।

5साल पहले तलाक, कर ली दूसरी शादी - 5साल पहले संस्कृति के मम्मी-पापा का तलाक हो गया था। संस्कृति की मां वैशाली ने जलगांव के सचिन संघवी से तो पिता गजेंद्र ने रिंकी नामक महिला से शादी कर ली।
भिलाईखेड़ा सामूहिक दुष्कर्म :साथ नहीं रहने दे रहे गांव वाले, तलाक की अर्जी
भिलाईखेड़ा सामूहिक दुष्कर्म मामले में साथ रह रहे पति-पत्नी ने आपसी समझौते के बाद एक-दूसरे की सहमति से तलाकनामा लिखकर पिपलौद थाने में पेश किया है। दोनों के चार बच्चे हैं। जिला न्यायालय में रिश्तेदारों की मौजूदगी में वकील द्वारा लिखे गए तलाकनामे में यह शर्त भी लिखी कि पति के पास दो लड़कियां पत्नी के पास एक लड़का और लड़की बालिग होने तक रहेंगे। तलाक के बाद दोनों ही दूसरा विवाह कर सकते हैं। महिला ने छह महीने पहले पति और दस रिश्तेदारों पर सामूहिक दुष्कर्मे का आरोप लगाया था। घटना के आठ दिन बाद उसने बयान पलट दिया।

इसलिए पेश किया तलाकनामा - पति को जेल से छुड़ाने के बाद दोनों ही कड़वी यादों को भुलाकर साथ-साथ रह रहे थे लेकिन समाज के तानों ने उन्हें एक साथ रहने नहीं दिया। रिश्तेदार और ग्रामीण घटना की याद दिलाते तो दोनों के जख्म फिर हरे हो जाते। रोज हो रही कलह के कारण आखिर दोनों ने तय किया कि अब वह साथ नहीं रहेंगे। अधिवक्ता मोहन गंगराड़े ने बताया अगर दोनों की सहमति से तलाकनामा पेश किया है तो छह माह के भीतर तलाक हो जाएगा। प्रक्रिया में समय लगता है।

खबर नहीं छपती तो आप मेरे पास नहीं आतीं : महिला सशक्तिकरण अधिकारी के सवाल के बाद युवती ने कहा खबर नहीं छपती तो आप भी मेरे से मिलने नहीं आतीं। मैं एक महीने से फुटपाथ पर भूखी सो रही थी। किसी ने एक समय का खाना भी नहीं दिया। मांगकर खा रही थी। तब किसी ने मेरे बारे में नहीं सोचा। अगर मुझे सहारा नहीं मिलता तो मर जाती।
यहां (बाल सखा) मुझे नौकरी मिल गई। मैं किसी पर आश्रित नहीं हूं। आस्था वेलफेयर सोसायटी द्वारा पारिश्रमिक भी दिया जाएगा। बाल सखा में कमजोर, अनाथ मजबूर बच्चों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग देना शुरू कर दी है। अब ऐसा लग रहा मैं अपने परिवार में गई हूं।
नेशनल खिलाड़ी से दुष्कर्म मामला ज्यादा जानकारी नहीं
: ज्यादती की शिकार युवती को आश्रय मिल गया है। यह अच्छी बात है। महिला सशक्तिकरण अधिकारी वहां क्यों गई थी। इस संबंध में उनसे बात की जाएगी।'' -एमके अग्रवाल, कलेक्टर
यूरिया के लिए कतार में घंटों पसीना बहाया : यूरिया की किल्लत ने महिलाओं को भी कतार में खड़ा कर दिया। वे चौका, चूल्हा छोड़कर यूरिया के लिए कतार लगाने को मजबूर हो गई हैं। यूरिया के लिए 10 घंटे की कतार उनके लिए किसी संघर्ष से कम नहीं लग रही। मंगलवार को जिला प्रशासन कृषि विभाग ने जिले के किसानों को इंदौर रोड स्थित जिला विपणन संघ के गोदाम से यूरिया उपलब्ध कराया। सरकारी कंपनी के चार डिस्ट्रीब्यूटर्स ने सरकारी गोदाम से ही किसानों को निर्धारित मूल्य पर यूरिया बेचा। यहां पर किसानों के अलावा महिलाएं भी यूरिया के लिए कतार लगाकर खड़ी रहीं। 1100 किसानों ने 10 घंटे लाइन में लगकर 145 टन यूरिया खरीदा। यूरिया दुकानों की बजाय चार डिस्ट्रीब्यूटर्स द्वारा सरकारी गोदाम से बेचा। किसानों को अधिकारियों की मौजूदगी में एक पावती पर तीन-तीन बोरियों का वितरण किया।
समाज के तानों से आहत होकर गैंगरेप की शिकार महिला को देना पड़ा तलाकनामा, उधर दुष्कर्म के बाद नेशनल खिलाड़ी से मिलने पहुंची महिला अफसर लेकिन नहीं की मदद, एक अन्य मामले में मासूम बोली- मारते हैं पापा।