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5 रु. में मिलने वाली बिजली की लागत मात्र 92 पैसे
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आपकेघरों में 5 रुपए प्रति यूनिट की दर से पहुंचने वाली बिजली इंदिरा सागर से मात्र 92 पैसे में बन रही है। यह आश्चर्यजनक खुलासा आरटीआई (सूचना का अधिकार) में हुआ है। ओंकारेश्वर बांध की बात करे तो यहां बिजली की लागत 1.70 रुपए रही है। इधर लागत से कई गुना ज्यादा में पहले से मिल रही बिजली के दाम एक बार फिर बढ़ाने की तैयारी है। एनएचडीसी इंदिरासागर से बन रही बिजली 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से मध्यप्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी को बेचती है। 249 गांव, नगर डुबोकर इंदिरासागर बांध का निर्माण और विस्थापन जनहित की बात कहकर किया गया। इस बांध से बिजली बनाने की क्षमता एक हजार मेगावाट है। यहां मांग के मुताबिक बिजली बनाई जा रही है। एनएचडीसी में प्रदेश शासन की 49 प्रतिशत भागीदारी है।
अब तक करीब 5000 करोड़ रु. कमाए
एनएचडीसीको अब तक करीब 5000 करोड़ रुपए शुद्ध लाभ हुआ है। विस्थापितों के अधिकारों के लिए एक दशक से संघर्ष कर रहे धर्मराज जैन ने कहा नाममात्र का मुआवजा देकर एनएचडीसी मोटी कमाई कर रहा है। पूंजीपती शेयर होल्डर को अकेले 2013-14 में 760 करोड़ रुपए का लाभांश बांटा गया।
शासन को भी होता है फायदा
^एनएचडीसीमें प्रदेश शासन का 49 प्रतिशत शेयर है। एनएचडीसी को लाभ होता है तो उसका फायदा शासन को भी मिलता है। यह पैसा विकास कार्यों में ही तो लगता है। जहां तक बिजली की दरों की बात है, यह तो नियामक आयोग तय करता है। रजनीशवैश, प्रमुख सचिव, एनवीडीए
लागत यानी बिजली बनाने के लिए होने वाला कुल खर्च
लागतयानी बिजली बनाने में होने वाला कुल खर्च है। इसमें बिजली बनाने के लिए लगाई मशीनें और उस पर काम करने वाले कर्मचारियों, अधिकारियों के वेतन भत्ते और बिजली बनाने के लिए उपयोग होने अन्य संसाधनों का खर्च होता है। बांध बनाने, मशीनें और ट्रांसमिशन के लिए लगाई गई लाइन पर आने वाले स्थापना खर्च को भी इसमें शामिल किया जाता है।
एनएचडीसी की कमाई
2003-04-12 करोड़37 लाख
2004-05- 33 करोड़95 लाख
2005-06- 106 करोड़
2006-07- 454 करोड़ 31 लाख
2007-08- 329 करोड़ 61 लाख
2008-09- 306 करोड़ 16लाख
2009-10- 212 करोड़30 लाख
2010-11- 304 करोड़ 12 लाख
2011-12- 640 करोड़
2012-13- 590 करोड़
2013-14- 1063 करोड़
कुलकमाई 4050 करोड़ रु. 2013-14 तक