पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • पुस्तकें मानव जीवन का अभिन्न अंग

पुस्तकें मानव जीवन का अभिन्न अंग

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
पुस्तकें मानव जीवन का अभिन्न अंग हैं। यह आने वाली पीढ़ी को इतिहास से अवगत कराती हैं। पुस्तकें पुस्तकालय की शोभा बनकर रह जाएं, उन्हें जन-जन तक पहुंचाकर लाभ की वस्तु बनाना ग्रंथपाल का ध्येय होना चाहिए।

यह बात माखनलाल चतुर्वेदी कन्या महाविद्यालय में पुस्तकालय विभाग द्वारा डॉ. रंगनाथन की स्मृति में आयोजित एक संगोष्ठी में मुख्य अतिथि गोपीनाथ कालभोर ने कही। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय राज्यों में पुस्तकालय की स्थापना सबसे पहले हो जाने से आज भी इन राज्यों को शिक्षा का प्रतिशत शेष राज्यों की तुलना में ज्यादा है। इस अवसर पर विशेष अतिथि रश्मि शुक्ला ने पुस्तकों को विद्यार्थियों का सबसे अच्छा मित्र बताया। एसएन कॉलेज के सरोज पांडे ने पुस्तकों को ज्ञान का सशक्त माध्यम बताया। डॉ.श्रीराम परिहार ने कहा पुस्तकें व्यक्तित्व निर्माण में सबसे सस्ता और सुंदर माध्यम है। इस अवसर पर पूनमचंद गुप्ता महाविद्यालय की उषा तिवारी, कर्मवीर विद्यापीठ के ओपी चौरे ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कर्मवीर विद्यापीठ में मनाया पुस्तकालय दिवस

खंडवा.पुस्तकालयदिवस के अवसर पर कर्मवीर विद्यापीठ में भी संगोष्ठी का आयोजन हुआ। इसमें प्रभारी प्राचार्य संदीप भट्ट, पुस्तकालय प्रभारी ओमप्रकाश चौरे ने अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर शिक्षक कमल किशोर उपाध्याय, प्रितेश अग्निहोत्री, राजेन्द्र परसाई, शिवेन्द्र मिश्रा, श्वेता चौधरी, श्रद्धा खरे, मिनिता दीवान के साथ ही विद्यार्थी उपस्थित थे।