खंडवा। सिंधी कॉलोनी में सात साल पहले
मोबाइल टॉवर लगा। यहां एक के बाद एक मोबाइल कंपनियां शेयरिंग करती गई। अब एक ही टॉवर से आठ मोबाइल कंपनियां सिग्नल दे रही है। इससे तय मापदंड से ज्यादा रेडिएशन का अंदेशा है। टॉवर के आसपास रहने वाले डेढ़ सौ परिवार के 400 लोग बीमार रहने लगे हैं। लोगों ने निगम आयुक्त, एसडीएम, एडीएम और यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन में गुहार लगाकर टॉवर हटाने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब लोगों ने जनआंदोलन खड़ा करने की ठानी है।
क्षेत्र के राहुल चंदवानी ने बताया टॉवर हटवाने के लिए मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर से मांग करेंगे। इसके बाद धरना-आंदोलन करेंगे। जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल करेंगे, जो टॉवर हटने तक जारी रहेगी।
सिंधी कॉलोनी में एक ही टॉवर से 8 कंपनियों के सिग्नल
गाइडलाइन का पालन किया : ''कुछ टॉवर पहले से लगे हैं। अब टॉवर लगाने में नई गाइडलाइन के मुताबिक ही इजाजत दी जा रही है।'' -एसआर सोलंकी, आयुक्त।
शिकायत आती है तो कराएंगे जांच : ''टॉवर लगाने की अनुमति देने का काम निगम का है। हमारे पास कोई शिकायत नहीं आई। आती है तो जांच कराई जा सकती है।'' -एमएस कवचे, एसडीएम।
कहीं नहीं है रेडिएशन की मॉनिटरिंग: शहरके बाकी हिस्सों में भी यही हालात हैं। रहवासी क्षेत्रों में टॉवर लगे हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक मोबाइल टॉवर रहवासी क्षेत्र में नहीं लगाए जाने चाहिए। शहर से बाहर, जरूरी होने पर शहर के अंदर खुले स्थानों, स्कूल, अस्पताल और रहवासी क्षेत्रों से कम से कम 100 मीटर दूर होने चाहिए। शहर में कुल 48 मोबाइल टॉवर हैं जिन्हें निगम ने लगाने की अनुमति दी है।
यह है नियम : टॉवर पर 900 मेगाहर्ट्ज पर 450 मिली वॉट रेडिएशन होना चाहिए। 1800 मेगाहर्ट्ज पर 900 मिली वॉट तय है। कंपनियों को इस मापदंड के पालन का स्वयं अपना सर्टिफिकेट बनाकार सरकार को देना होता है। यहां कितनी रेडिएशन है, यह कोई भी अफसर बताने को तैयार नहीं है।
ज्यादा रेडिएशन से होती है यह बीमारियां : सिविल सर्जन डॉ.ओपी जुगतावत के मुताबिक रेडिएशन से गठिया वात, आधे सिर का दर्द (माइग्रेन), पुरुषों की काम उत्तेजना में कमी, दमा (फेफड़ों की कमजोरी), ब्लड प्रेशर, ब्रेन स्ट्रोक (लकवा), ब्रेन ट्यूमर ब्रेन कैंसर, महिलाओं में मासिक धर्म को अनियमितता जैसी बीमारियां होती है।
हाई ब्लड प्रेशर और अस्थमा लग गया : ''पम्मी गोस्वामी को हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत है। इंदौर में भी इलाज करा चुकी हैं। स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो रहा है। अस्थमा भी हो गया है।''
बच्चों की ग्रोथ ही रुक गई: ''टॉवर के ठीक नीचे बने घर में रहने वाली मुस्कान चंदानी ने बताया घर में बच्चों की ग्रोथ नहीं हो रही है। डॉक्टर कारण नहीं बता नहीं पा रहे। घर में प्रेग्नेंसी नहीं हो पा रही है। टॉवर की आवाज के कारण रात में ठीक से सो भी नहीं पाते हैं।''
हाथ-पैरों में सूजन : मोबाइल टॉवर से लगे घर में रहने वाली संगीता गोस्वामी ने बताया उनके पैरों में सूजन है। इंदौर से इलाज करा रहे ठीक नहीं हो रही है। नींद नहीं आती। हाथ-पैरों में दर्द बना रहता है। जोड़ों में दर्द है। खंडवा, इंदौर में इलाज कराया दर्द ठीक नहीं हो रहा है।
ज्योति मंगवानी | आंखोंके सामने अंधेरा छाना, चक्कर आना, हाथ पैर और जोड़ों में दर्द।
रोशनी सोनी - हाथपैर में हमेशा दर्द, झनझनाहट, बिटिया हर्षिता की ग्रोथ नहीं हो रही।
इनकी सेहत भी बिगड़ी
कविता लधाणी - कंधोंघुटनों में दर्द, आंखों में धुंधलापन।
वीनावंजानी - आंखोंमें रोशनी कम हो गई। बच्चे सोते नहीं।
गोदावरी लधाणी-हाथ पैरोंमें दर्द, आलसीपन आता है।
रेखा उधवानी-बच्चों मेंचिड़चिड़ापन, सिर दर्द।
भावनाहेमवानी-ब्लड प्रेशर,सिर में दर्द, उल्टियां हमेशा बुखार बना रहता है।
साधना उधवानी- थाइराइड की समस्या,इलाज के बाद भी सुधार नहीं।
राशि चंदवानी-प्री मैच्योरडिलेवरी हुई।
पुष्पा चंदवानी-सिरदर्द, नींदआना, घबराहट, उल्टियां आना।
राजकुमारहेमवानी- सांस फूलना, हाथ पैरों में दर्द। टावर के वाइब्रेशन ने दीवारों में कंपन।
मोबाइल टॉवर से रही खतरनाक रेडिएशन से यह लोग हो गए बीमार ।
डेढ़ सौ परिवार के लोगों की सेहत खतरे में,
निगम आयुक्त, एसडीएम, एडीएम और सीएम हेल्पलाइन पर लगाई गुहार, लेकिन कोई असर नहीं।