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स्वाइन फ्लू की आशंका में दो भर्ती, सैंपल भेजे

6 वर्ष पहले
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कलेक्टर ने जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड का दौरा कर व्यवस्था देखी।

खंडवा। स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों को दवा देकर लौटाने की खबर पर कलेक्टर एमके अग्रवाल ने शनिवार को जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने डॉक्टरों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने स्वाइन फ्लू मरीजों के इलाज की व्यवस्था देखी। उन्होंने मरीजों की केस हिस्ट्री देखने के बाद सीएमएचओ, सिविल सर्जन जिला नोडल अधिकारी के साथ बैठक कर स्वाइन फ्लू को रोकने के लिए किए गए उपायों पर चर्चा की। जरूरत बताने को कहा। इधर, शनिवार को एक महिला एक पुरुष मरीज को स्वाइन फ्लू की आशंका पर जांच के लिए भर्ती किया गया। दोनों ही मरीजों के स्वाब जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजा है। एक मरीज की स्थिति सुधरने पर उसे घर भेज दिया है। इनकी जांच रिपोर्ट बाने के बाद स्वाइन फ्लू होने होने की पुष्टि होगी। जांच रिपोर्ट 48 घंटे में आने की संभावना हैं। एक मरीज की स्थिति सुधरने पर उसे घर भेज दिया है। कलेक्टर अग्रवाल ने निजी अस्पतालों को स्वाइन फ्लू की गाइड लाइन भेजने के निर्देश दिए, ताकि इन अस्पतालों में स्वाइन फ्लू पर जरूरी सावधानी रखी जाए।

सीएमएचओ ने दिया प्रशिक्षण : सीएमएचओ डॉ.पनिका ने अस्पताल के डॉक्टरों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ काे शाम को प्रशिक्षण दिया। अस्पताल के कांफ्रेंस हॉल में डॉ.पनिका ने स्टॉफ को मरीजों के इलाज के दौरान जरूरी सावधानी के संबंध में बताया। साथ ही लक्षणों की जानकारी दी।

सर्दी-जुकाम के 32 मरीज आए : अस्पताल के सर्दी-जुकाम कार्नर पर शनिवार सुबह और शाम की ओपीडी में 32 मरीज आए। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.अनिरुद्ध कौशल ने मरीजों को जांच की। सर्दी-जुकाम के मरीजों की जांच रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग भोपाल को भेजी है।
लक्षणों की 3 कैटेगिरी|पहले 2 में टेस्ट जरूरी नहीं, तीसरे में हों भर्ती : स्वाइन फ्लू के भय से साधारण जुकाम, बुखार के लोग भी जांच कराने के लिए अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार ऐसा नहीं करें और जांच कराने से पहले डॉक्टर को दिखाएं। घबराएं नहीं। डॉक्टरों के मुताबिक स्वाइन फ्लू तीन कैटेगरी में है और इनके अलग-अलग लक्षण हैं। बी-1 व बी-2 में टेस्ट करवाने की आवश्यकता नहीं है।
ए कैटेगरी : - हल्का बुखार, खांसी, गले में हल्का दर्द।
- दवा और स्वाइन फ्लू के टेस्ट की जरूरत नहीं।
- घर के बाहर नहीं निकलें और एहतियात के तौर पर डॉक्टर को दिखा सकते हैं।

बी कैटेगरी : बी-1 में तेज बुखार, गले में तेज दर्द और खराश। इसमें टेमी फ्लू दवा ले सकते हैं। बी-2 कैटेगरी में भी तेज बुखार, गले में तेज दर्द होता है। यह गर्भवती महिलाओं, लंग्स, हार्ट, कैंसर, लीवर, किडनी पेंशेंट के लिए है। इसमें मरीजों को दवा के साथ डॉक्टर की सलाह से विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
सी कैटेगरी : तेज बुखार, सांस में परेशानी, छाती में दर्द, ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव, नाखून नीले, थूक में खून। इन लक्षणों के आने पर तुरंत टेस्ट कराएं। डॉक्टर की सलाह से तुरंत अस्पताल में भर्ती हों।