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छात्र बोला- खाने में तीन रोटियां मिलती हैं, बच्चों के पास जूते-चप्पल भी नहीं हैं

4 वर्ष पहले
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कलेक्टर बोले- भरपेट भोजन और सभी विद्यार्थियों को मेरी तरफ से जूते-चप्पल दिलवाओ

भास्कर संवाददाता | खालवा

कुपोषण के लिए प्रदेशभर में चर्चित खालवा के गोद लिए गांव गारबेड़ी के हालात जानने के लिए कलेक्टर अभिषेक सिंह शुक्रवार को यहां पहुंचे। इस दौरान अव्यवस्थाओं पर पर्दा डाल रहे अफसरों पर कलेेक्टर नाराज हुए। मध्याह्न भोजन की स्थिति जानने पहुंचे कलेक्टर को एक विद्यार्थी ने बताया साहब खाने में तीन रोटियां मिलती हैं। वहीं उसके पैरों में चप्पल-जूते न देख कलेक्टर ने सवाल पूछा तो उसके पिता ने कहा गांव में विद्यार्थियों के पास पहनने के लिए जूते-चप्पल नहीं है। कलेक्टर ने भरपेट भोजन और सभी बच्चों को जूते-चप्पल उपलब्ध कराने के निर्देश दे डाले।

गारबेड़ी में निरीक्षण के दौरान उपस्थित नहीं रहने पर अफसरों पर कलेक्टर ने नाराजी जताई और घर-घर जाकर स्थिति देखने निकल पड़े। पहले ही घर में महिला बाल विकास विभाग की लापरवाही सामने आई। घर में छह माह की बच्ची का रिकार्ड आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से मांगा तो वह बगलें झांकने लगी। सेक्टर सुपरवाइजर ने बात संभालने का प्रयास करते हुए कहा यह परिवार एक माह पहले ही आया है तो बच्ची के पिता ने कहा साहब छह माह हो गए हैं। इस पर कलेक्टर ने सुपरवाइजर से कहा बकवास बंद करो। झूठ मत बोलो। मैं सारी स्थिति देख रहा हूं। अब तक बच्ची का वजन नहीं लिया तो टीका क्या लगाया होगा। आज से ही इसका टीकाकरण शुरू करो।

कलेक्टर का काफिला गांव के कालूराम के घर पहुंचा। परिवार से राशन की जानकारी ली। इस दौरान कालू का पांचवीं में पढ़ने वाला बेटा अभिषेक भी आ गया। उन्होंने उससे मध्याह्न भोजन के बारे में पूछा। अभिषेक ने बताया तीन रोटियां मिलती हैं। इस पर कलेक्टर ने जनपद सीईओ से पूछा इतने में पेट भर जाता है क्या। बच्चों को भरपेट भोजन दिया जाए। बात करते समय कलेक्टर की नजर बच्चे के पैरों पर गई तो उन्होंने पूछा चप्पल कहां छोड़ आए। कालू ने बताया बच्चों के पास चप्पल ही नहीं है। इस पर कलेक्टर ने गांव के सभी छात्र-छात्राओं को अपनी ओर से जूते-चप्पल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने गारबेड़ी में छात्र अभिषेक को नंगे पैर देखा तो गांव के सभी विद्यार्थियों के लिए जूते-चप्पल अपनी ओर से देने के निर्देश दिए।

400 घरों में बनेगा किचन गार्डन
कलेक्टर ने कहा गांव के 400 घरों में किचन गार्डन तैयार किया जाए। इसकी जिम्मेदारी उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक की रहेगी। ग्रामीणों से घरों के आसपास खाली पड़ी जमीन पर हरी सब्जियां लगवाएं ताकि बच्चों को ताजी सब्जी मिल सके। इससे बच्चों का वजन भी बढ़ेगा।

सावलीखेड़ा में सिर्फ औपचारिकता निभाई
कलेक्टर का काफिला गारबेड़ी से रवाना होकर पुलिस अधीक्षक के गोद लिए गांव सावलीखेड़ा पहुंचा। यहां आंगनवाड़ी भवन में औपचारिक बैठक कर दोनों अफसर खंडवा लौट गए।

15 घर जाकर ग्रामीणों से मूलभूत सुविधाओं का पूछा
कलेक्टर सिंह सबसे पहले पंचायत भवन के बाजू में रहने वाले शांतूलाल के यहां पहुंचे थे। वह स्वयं के प्रधानमंत्री आवास निर्माण में मजदूरी कर रहा था। कलेक्टर झोपड़ी में पहुंचे। शांतू की छह माह की बेटी पूजा को गोद में उठाकर उसका आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से रिकार्ड मागंने पर यह स्थिति सामने आई। उन्होंने शांतू की 5 व 6 साल की बेटियों को स्कूल भेजने के निर्देश सहायक आयुक्त नीरज पाराशर को दिए। इसके बाद कलेक्टर ने करीब 15 घर जाकर ग्रामीणों से मूलभूत सुविधाओं और रोजगार की जानकारी ली।

यह भी हुआ
गांव की महिलाओं ने बंद हैंडपंप के साथ पेयजल की समस्या बताई। कलेक्टर ने पीएचई एसडीओ बीडी भारद्वाज को तत्काल नल-जल योजना बनाने के निर्देश दिए।

6 घरों में बच्चों को पूरक पोषण आहार नहीं मिलने पर नाराजी जताते हुए महिला बाल विकास अधिकारी संजय भारद्वाज से कहा कुपोषण के पीछे पूरक पोषण आहार न मिलना बड़ा कारण है और इसके लिए आप जिम्मेदार हैं। मुझे अभी जवाब दीजिए, लेकिन भारद्वाज कोई जवाब नहीं दे सके।

सीएमएचओ रतन खंडेलवाल ने कुपोषित बच्चों को िवटामिन और प्रोटीन की अति आवश्यकता बताते हुए दवाई देने की बात कही। कलेक्टर ने कहा आप दवाई का इंतजाम करें। इसका खर्च महिला बाल विकास िवभाग के अफसरों के वेतन के काटा जाएगा।

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