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रिश्वतखोर पूर्व सहायक भू-अभिलेख अधीक्षक को 4 साल का कारावास

4 वर्ष पहले
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जमीन की नपती और सीमांकन के नाम पर रिश्वत मांगने और इसमें से आधी रकम ले चुके भू-अभिलेख कार्यालय के पूर्व सहायक अधीक्षक लक्ष्मण श्यामलाल मालवीया को दो अलग-अलग धाराओं में चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। उस पर दो हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया है। फैसला शुक्रवार को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम विशेष न्यायाधीश अतुल्य सराफ की अदालत ने दिया। शासन की ओर से पैरवी सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी लोकायुक्त विनोद पटेल ने की।

शहर के संतोष नगर निवासी अभय पिता कांतिलाल जैन द्वारा बरुड़ में खरीदी गई जमीन की नपती और सीमांकन के बदले लक्ष्मण मालवीया ने तीन लाख की मांग की थी। 20 सितंबर 2014 को उसने 30 हजार, इसके दूसरे दिन 70 हजार और 26 सितंबर को 50 हजार रुपए अभय से लिए। 50 हजार रुपए देते हुए अभय ने इसका वीडियो बना लिया। इसके दूसरे ही दिन लोकायुक्त इंदौर में वीडियो सहित शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच के बाद लोकायुक्त ने 30 अप्रैल 2016 को न्यायालय में चालान पेश किया। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने धारा 7, धारा 13 (1) (घ) सहपठित धारा 13 (2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत दोषी पाया। उसे चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाने के साथ एक-एक हजार रुपए जुर्माना भी लगाया गया। लक्ष्मण सेवानिवृत्त हो चुका है। उसे अदालत से कोर्ट भेज दिया।

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