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सेल्दा में 15 दिन से ब्लैक आउट

7 वर्ष पहले
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इंदिरासागर परियोजना से बिजली उत्पादन के लिए जिन लोगों ने अपना गांव और जमीन छोड़ी वे ही अब बिजली के लिए तरस रहे हैं। एक पखवाड़े से इस विस्थापित गांव के लोग ब्लैक आउट का शिकार हैं। कई बार ग्रिड पर जाकर गुहार लगा चुके हैं लेकिन परिणाम शून्य है। स्थिति यह बन गई है कि गेहूं पिसाने के लिए भी पांच किमी दूर छनेरा (हरसूद) जाना पड़ रहा है।

यह पीड़ा है छोटी तवा नदी किनारे से विस्थापित किए गए एक हजार की आबादी वाले सेल्दा गांव के लोगों की। डूब के बाद नए सिरे से बसाए गए पुनर्वास स्थल पर गेहूं, धान, दाल पिसाने के लिए दो चक्की हैं। बिजली के अभाव में इन पर ताले लग चुके हैं। ग्रामीणों को समीप के गांव मांडला, चारखेड़ा या छनेरा जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा बंद ट्रांसफार्मर बदलने के लिए जावर, मूंदी तथा खंडवा तक गुहार लगा चुके हैं। इस पुनर्वास स्थल से बैक वाटर मात्र 500 मीटर दूर होने के कारण गांव में मच्छरों की भरमार है। ग्रामीणों को वर्षाजनित बीमारियों से दो-चार होना पड़ रहा है।

विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित

गांवके प्राथमिक और मिडिल स्कूल में क्रमश: 159 71 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। छह माही परीक्षा की तैयारी का बोझ है, लेकिन बिजली के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

कंपनीको देंगे निर्देश

^तहसीलके ग्राम सेल्दा में 15 दिन से ब्लैक आउट की जानकारी आपसे मिली है। अविलंब बिजली कंपनी को व्यवस्था सुचारू करने का निर्देश देंगे। सुरेशचंद्रवर्मा, एसडीएमहरसूद

28 अगस्त से बंद है गांव में बिजली

सेल्दा के ग्रामीणों ने बंद पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने की मांग की।

गांव की बिजली 28 अगस्त से गुल है। गणेशोत्सव के दौरान ही ब्लैक आउट के कारण उत्सव फीका रहा। ग्रामीणों ने बताया पहले गांव में दो ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। कुछ दिन बाद एक ट्रांसफार्मर बिजली कंपनी ने दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया। पूरे गांव का लोड एक ही ट्रांसफार्मर पर आने से वह भी खराब हो गया। इस बदलने अथवा सुधारने कंपनी ने एक पखवाड़ा गुजार दिया। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।