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चौपाल पर बनेगा काम का मास्टर प्लान

7 वर्ष पहले
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ग्रामीणचौपाल पर बैठकर मनरेगा का बजट तय करेंगे। वे बताएंगे कि गांव में कौन से काम होने हैं। कहां होने हैं। पहले क्या कराना है और बाद में क्या कराना है। यह सब तय करने का अधिकार अब ग्रामीणों को दे दिया गया है। यह सब लेबर बजट सघन सहभागिता अभ्यास के तहत होने वाला है। मनरेगा के कार्यों को बेहतर बनाने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इसे केंद्र सरकार ने शुरू किया है। अब मनरेगा में होने वाले कार्यों और काम पर लगने वाले मजदूरों को गांव वाले ही तय करेंगे। काम चयन और शुरू करने में सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की भूमिका खत्म हो जाएगी। साल भर के काम एक चौपाल पर तय हो जाएंगे। उनकी प्राथमिकता तय की जाएगी। प्राथमिकता के आधार पर साल भर काम चलते रहेंगे।

अभी यह स्थिति

मनरेगामें अभी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक काम शुरू कर देते हैं। गांव वालों से नहीं पूछा जाता। कई काम शुरू होने के बाद पूरे नहीं हुए। काम गांव से दूर गैर जरूरी स्थानों पर शुरू कर दिए जाते है। लोग काम पर नहीं जाते।

बजट सघन सहभागिता प्रक्रिया से तैयार होगा

^केंद्रसरकार ने लेबर बजट तैयार करने में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए कहा है। लेबर बजट सघन सहभागिता प्रक्रिया से तैयार होगा। इसमें लोगों से पूछकर काम और मजदूरी की जरूरत तय होगी। -प्रमोद त्रिपाठी, परियोजनाअधिकारी, मनरेगा

ऐसे तैयार होगा बजट

गांवमें एक दिन चौपाल बुलाई जाएगी। इसमें गांव के दो तरह के नक्शे बनेंगे। एक सामाजिक नक्शा दूसरा संसाधन नक्शा। सामाजिक नक्शा गांव में समाज की स्थिति बताएगा। इसमें मोहल्लों के नाम, उनमें रहने वाले लोग, उनके स्तर की जानकारी दी जाएगी। संसाधन नक्शे में गांव में मौजूद कुआं, तालाब, बावड़ी, स्कूल, हैंडपंप आदि को चिह्नित किया जाएगा। दोनों तरह के नक्शे तैयार होने के बाद गांव के लोगों से ही जरूरत के हिसाब से पूछा जाएगा कि कहां क्या बनाना है। साथ ही गांव में सबसे ज्यादा काम की जरूरत किसे है यह भी गांव वालों से ही जाना जाएगा। गांव वालों से पूछी बातें लिखकर उनसे सहमति ली जाएगी। यह काम का मास्टर प्लान होगा।

प्रशिक्षण के दौरान बजट बनाने के लिए गांव का नक्शा बनाते ग्रामीण।

{ कामों में लोगों की भागीदारी बढ़ेगी। उन्हें बजट और काम की पूरी जानकारी होगी।

{ बजट का दुरुपयोग नहीं होगा। काम शुरू होने के बाद बीच में बंद नहीं होंगे।

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