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एक दिन में कोर्ट के आधे केस खत्म

7 वर्ष पहले
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खंडवा। शनिवार को नेशनल लोक अदालत लगी। जिला न्यायालय में विचाराधीन 4700 प्रकरणों में जारी समंस में 2300 का निराकरण हो गया। यानी आधे मामले एक ही दिन में सुलझ गए। 2 लाख 55 हजार 775 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। कुल 5 लाख मामलों का निराकरण हुआ। जिला न्यायालय की 18 एवं अन्य विभागों की 48 खंडपीठ गठित की। दिनभर में 1 करोड़ 34 लाख रुपए वसूले। दुर्घटना दावा के 98 लाख और 39 लाख रुपए के अवार्ड भी पारित हुए। सबसे ज्यादा मामले एसीजेएम गंगाचरण दुबे की कोर्ट ने निपटे। यहां दिनभर में 435 मामलों में सुलह हुआ। अन्य कोर्ट में भी दिनभर पक्षकारों की भीड़ रही। सुबह 10.30 बजे नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ जिला एवं सत्र न्यायाधीश अभिनंदन कुमार जैन, कलेक्टर एमके अग्रवाल, एसपी एमएस सिकरवार, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष सरदारसिंह तंवर ने किया।
विशेष न्यायाधीश गौरीशंकर दुबे, सीजेएम धनराज दुबेला, न्यायाधीश निलेश कुमार जिरेती, जिला उपभोक्ता फोर अध्यक्ष शैलेंद्र शुक्ला, न्यायाधीश दिनेश देवड़ा, केके गेहलोत सहित अन्य कुल 18 पीठ के अलावा हरसूद की दो पीठ में प्रकरणों का निराकरण हुआ। इस साल पिछले साल की तुलना में दोगुना मामलों में सुलह हुई। कोर्ट में सभी विभागों के काउंटर भी लगे।

ढाई साल से लड़ रहे थे सगे भाई, ढाई मिनट में गले मिले : मूंदीपुरा निवासी शेख नसीर पिता हबीब ने शेख रशीद पिता शेख हबीब और सात अन्य रिश्तेदारों के खिलाफ केस लगाया था। मामला नौ फीट जमीन को लेकर था। जज ने समझाइश दी और दोनों पक्ष मान गए।

5 साल से अलग रह रहे पति-पत्नी मिले : पति से विवाद के बाद दो बेटियों और एक बेटे के साथ पांच साल से अलग रह रही पत्नी को न्यायाधीश अक्षय द्विवेदी और वकील पुष्पा गौर ने मिलाया। आवेदक लोकेश पिता हीरालाल सेन निवासी मालखेड़ा ने पत्नी प्रभाबाई और बच्चों को लेने के लिए केस लगाया था।


सवा 4 लाख रुपए लेने के बाद मंजूर किया तलाक : पति द्वारा तलाक देने के चार साल बाद बेटे की परवरिश और पढ़ाई लिखाई के लिए पति से 4 लाख 25 हजार रुपए लेने पर पत्नी ने तलाकनामे पर हस्ताक्षर किए। जज गंगाचरण दुबे की कोर्ट में यासीन ने जुबेदा को सवा चार लाख रुपए देकर बेटे के नाम एफडी करवा दी और तलाक ले लिया।
समझौते के बाद जाम का पौधा भेंट : न्यायाधीश अक्षय कुमार द्विवेदी की अदालत में एक साल से चल रहे मामले में वकील पुष्पा गौर की मध्यस्थता के बाद समझौता हो गया। संजय पिता कैलाश मोरे निवासी सिविल लाइन ने पत्नी सुनीता और बेटे को पाने के लिए विवाह की पुनर्स्थापना के तहत केस लगाया था। समझौते के बाद जज ने दंपती को जाम का पौधा भेंट किया।

एक ही जिले में नौकरी करेंगे पति-पत्नी : सरकारी नौकरी होने के कारण पति-पत्नी अगल-अलग जिलों में नौकरी कर रहे थे। दोनों में वैचारिक मतभेद हो गए। पत्नी ने जिला न्यायालय में घरेलू हिंसा का का केस लगा दिया। न्यायाधीश गंगाचरण दुबे ने फैसला देते हुए शासन को आदेशित किया कि दोनों का एक ही जिले में स्थानांतरण किया जाए। सुनीता पति राजेंद्र गोलसार बुरहानपुर जिले में आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक है। पति राजेंद्र गोलसर खुटला कला कन्या स्कूल में शिक्षक है।
3 साल के मामले
2012 - 1.80
2013- 2.89
2014- 5.00
बगैर अनुमति स्टाल लगाए, भगाया : न्यायालय परिसर में बगैर अनुमति के स्टाल लगाने पर फायनेंस कंपनियों के कर्मचारियों को स्टाल सहित जज ने बाहर का रास्ता दिखाया। कंपनी के कर्मचारियों ने लोक अदालत में स्टाल के लिए सूचना नहीं दी थी। जज की फटकार के बाद स्टाल हटाए गए।
नेशनल लोक अदालत | जिले की 66 खंडपीठ ने एक ही दिन में पांच लाख मामलों में कराई सुलह, 1.34 करोड़ रुपए वसूले, 39 लाख के अवार्ड पारित कराए, कोर्ट में चल रहे 4700 में से 2300 केस निपटे ।