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भुई मति लोट म्हारा बाल रे मुकुंदा बाल मुकुंदा म्हारा रेशम का फुंदा
भुई मति लोट म्हारा बाल रे मुकुंदा..., बाल मुकुंदा म्हारा रेशम का फुंदा..., झगो सिलाई दयूं तुख टोपी सिलाई दयूं..., अरु सिलाई दयूं तुख वागी रे गोविंदा...। ऐसे ही कई निमाड़ी भजनों से शनिवार रात 8.30 बजे गौरीकुंज सभागृह गूंज उठा।
अवसर था कुसुम दवे के निमाड़ी भक्ति पदों का संकलन ‘रेशम का फुंदा बाल मुकुंदा’ पुस्तक के विमोचन समारोह का। रात 8 बजे अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। स्थानीय कलाकारों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि न्यायाधीश गंगाचरण दुबे, विधायक देवेंद्र वर्मा, नवनिर्वाचित महापौर सुभाष कोठारी और विशेष अतिथि कांग्रेस नेता परमजीत सिंह नारंग, अवधेश दवे, इंदौर के गिरधर नागर थे। विमोचन समारोह का संचालन साहित्यकार आलोक सेठी और आशीष दवे ने किया।
{मुंबई के गायक गणेश पाटिल ने चल कि तुझे मैं लेके चलूं एक ऐसे गगन के तले..., मेरे दिल के चैन..., एक अजनबी हसीना से यूं मुलाकात हो गई... सहित किशोर दा के अन्य गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
{ पुणे की मोना शांडिल्य ने बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता है..., जरा-सी आहट होती है तो दिल सोचता है... आदि गीत सुनाए।
{ इंदौर के विवेक वाघोलीकर ने दिल की आवाज भी सुन मेरे फंसाने पर जा... मो. रफी और मुकेश की आवाज से देर रात तक गौरीकुंज सभागृह में श्रोताओं को बांधे रखा।
इन्हें सुनने के लिए देर रात तक डटे रहे श्रोता
गौरीकुंज सभागृह में रेशम का फुंदा बाल मुकुंदा का विमोचन करते अतिथि।