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चांदी का ताला खोल मस्जिद का शुभारंभ करेंगे मौला

5 वर्ष पहले
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बोहरा समाज के 53वें धर्मगुरु हिज होलिनेस डॉ.सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन मौला गुरुवार शाम 5 बजे शहर में तशरीफ लाएंगे। शाम 6 बजे अपने काफिले के साथ हरिगंज स्थित मस्जिद पहुंचेंगे। यहां मगरिब की नमाज अदा करने के बाद चांदी का ताला खोलकर मस्जिद का शुभारंभ व नामकरण करेंगे।

कार्यक्रम के बाद सैफी कॉलोनी में रात्रि कयाम करेंगे। शुक्रवार सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक टाउनहाल स्थित हुसैनी बोहरा मस्जिद में जुमा की नमाज व वाअज पेश करेंगे। दोपहर में आराम के बाद शाम 6 बजे सैफी कॉलोनी मस्जिद में वाअज व समाजजन से कदमबोसी होगी। सैयदना साहब के आगमन से एक दिन पहले सैफी कॉलोनी में उनके निवास व मस्जिद के आसपास की सुरक्षा व्यवस्था बुरहानी गार्ड ने संभाल ली। जिस मकान में सैयदना साहब का कयाम होगा वहां पर चयनित लोगों को ही प्रवेश दिया जा रहा है। आका मौला शुक्रवार से अपने मुबारक कदम समाजजन के घर में रखेंगे। मौला की नजरें इनायत हो जाए इसलिए सैफी कॉलोनी में बुधवार सुबह से देर रात तक युद्ध स्तर पर साफ-सफाई और निर्माण कार्य चले।

महिलाओं ने मेहंदी लगाई
बुधवार शाम महिलाओं व युवतियों ने हाथ-पैरों में मेहंदी लगाई। बोहरा बहुल क्षेत्रों में शादी की तरह माहौल था।

150 फीट का रैंप बना
शब्बीर भाई ताहेरी के मकान से हकीमी मस्जिद की दीवार तक 150 फीट का रैंप मौला के लिए बनाया है। इस पर पैदल होते हुए मौला साहब मस्जिद तक तशरीफ ले जाएंगे। शुक्रवार जुमा की नमाज व वाअज के बाद ज्यादातर कार्यक्रम सैफी काॅलोनी में होंगे।

हरिगंज स्थित मस्जिद का मौला साहब शुभारंभ करेंगे।

150 साल पुरानी है मस्जिद
मस्जिद में लगे चांदी के ताले को गुरुवार शाम आका मौला अपने मुबारक हाथों से खोलकर इफ्तेताह करने के बाद वक्फ नामा पढ़कर खुदा की राह में मस्जिद को वक्फ कर देंगे। बोहरा समाज के प्रवक्ता अमीरउद्दीन हुसैन ने बताया बोहरा समाज के 20-25 परिवारों के लिए 150 साल पहले समाजजन ने हरिगंज क्षेत्र में मस्जिद का निर्माण किया। जैनुद्दीन बर्तनवाला परिवार व समाजजन के सहयोग से मस्जिद का नए तरीके से नवनिर्माण हुआ। मस्जिद में 200 से ज्यादा लोग नमाज अदा कर सकते हैं।

बतख-खरगोश मौला साहब के प्रिय
बतख व खरगोश सैयदना साहब के प्रिय हंै। वे अल सुबह नमाज व चहल कदमी के बाद बतख व खरगोश को दाना खिलाते हैं। उनके कयामगाह स्थित बगीचे में 6 बतख व 4 खरगोश भी रखे गए हैं।

सैयदना साहब का दीदार आज : -
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