पैनकार्ड की अनिवार्यता खत्म करने की मांग, धरने पर बैठे
लचर कानून से बचने के लिए व्यापारी ढूंढ लेते हैं सत्रह सौ साठ गलियां
सरकार धीरे-धीरे सोने के जेवर खरीदने पर लिमिट कम करती जाएंगी। अभी 2 लाख रुपए है, तो उसे घटाकर 50 हजार रुपए और एक दिन सोना खरीदी तक अनिवार्य कर देगी। जब भी सरकार की ऐसी नीति आती है। तो सबसे ज्यादा प्रभाव जनता पर पड़ता है। जनता कभी विरोध नहीं करती।
व्यापारियों को ही आगे आना पड़ता है। देश के लचर कानून से बचने के लिए व्यापारी सत्रह सौ साठ गलियां ढूंढ लेते हैं। यह कहना हैं खंडवा सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष किशोर सोनी का। यदि ग्राहक के पास पैन कार्ड नहीं है तो उनसे फार्म भरवाना है। अभी खंडवा में 10-12 प्रतिशत लोगों के पास पैन कार्ड है। ऐसे में किसान या अन्य किसी ग्राहक से सोना खरीदने से पहले फार्म भराना है। जिसमें सोना खरीदने के रुपए कहां से लाए, बताना होगा। छोटे व्यापारी अब ग्राहकी करें या फार्म भराए। इससे दोनों का समय खराब होगा। या फिर इसके लिए एक अतिरिक्त कर्मचारी रखें। सरकार को चाहिए कि पहले वे सभी को पैन कार्ड अनिवार्य कर दें। कानून बनाए तो सभी के लिए बराबर हो। इससे बगैर बिल के सोना बेचने वालों की चांदी हो जाएगी। कुछ लोग यहां भी दो नंबर का काम शुरू कर देंगे। खंडवा में तो इतना सोना खरीदने वाले सालभर एक या दो ग्राहक आते हैं। इसलिए पैन कार्ड 10 लाख रुपए की खरीदी पर अनिवार्य करें। ऑल इंडिया सराफा एसोसिएशन के निर्देश पर आगे भी विरोध जताएंगे।
खंडवा सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष किशोर सोनी ने कहा 12% लोगों ने बनाए हैं पैन कार्ड
हड़ताल के दौरान रास्ता रोककर एक घंटे तक सराफा व्यापारी धरने पर बैठे।