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तारीफ वाला शहर है खंडवा, बाबा-दादा भी यहां आए

5 वर्ष पहले
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बोहरा समाज के 53वें दाई-उल-मुतलक डॉ.सैयदना सैफुद्दीन मुफद्दल साहब ने शुक्रवार सुबह टाउनहाल स्थित हुसैैनी मस्जिद में वाअज के बाद जुमा की नमाज पढ़ाई। मौला के पीछे नमाज पढ़ने के लिए समाजजन का हुजूम उमड़ पड़ा।

सनगली क्षेत्र में सुबह 7 बजे समाजजन अपने आका मौला का दीदार करने के लिए परिजन के साथ पहुंचे। 10.05 बजे जैसे ही मौला दिखाई दिए तो जायरीनों की आंखें छलक पड़ी। वाअज में मौला ने बोहरा समाज के दाई-उल-मुतलक व खंडवा शहर के अतीत के बारे में समाजजन को बताया। मौला ने कहा फातेमी दावत तीन खंड हिंद, सिंध और यमन में फैली है। दुनिया कई खंडों में बंटी है। उन्होंने खंडवा को तारीफ वाला शहर बताया। खंड (भाग) वा (वाह) मतलब खंडवा तारीफ वाला हिस्सा है। मौला ने कहा मुझसे पहले यहां चार दाई-उल-मुतलक तशरीफ लाए। मेरे फरजंदों तुम हजरत मोहम्मद से मोहब्बत रखो। सिर्फ ईमान लाना और मोमिन होना ही काफी नहीं होता। अगर हजरत मोहम्मद से मोहब्बत है तो हराम काम (जुआ, सट्टा, शराब, ब्याज आदि) से दूर रहो। नेक इंसान बनो। अपने वतन से मोहब्बत रखना भी ईमान की निशानी है। जुमा की नमाज के बाद सैयदना साहब ने देश, प्रदेश व शहर में अमनो की दुआ मांगी। मौला ने कहा खंडवा शहर में खूब बरकत हो। लोगों में ऐसी ही मोहब्बत बनी रहे। बोहरा समाज के अलावा पूरा शहर स्वागत के लिए आतुर नजर आया। यहां खूब बरकत हो।

हुसैनी बोहरा मस्जिद में आका मौला से कदमबोसी के लिए हाथ आगे बढ़ाता बच्चा।

5वें दाई-उल-मुतलक आए थे खंडवा
बोहरा समाज के 51वें दाई-उल-मुतलक सैयदना ताहेर सैफुद्दीन के इंतकाल के बाद उनके बेटे सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन 52वें दाई-उल-मुतलक गद्दीनशीन जलवा अफरोज हुए। इसके बाद 53वें दाई-उल-मुतलक सैयदना सैफुद्दीन मुफद्दल मौला बने। खंडवा में 49 व 50वें दाई भी तशरीफ ला चुके हैं, जो कि समाजजन को पता नहीं था। शुक्रवार को सैयदना साहब ने वाअज के दौरान यह बात बताई।

मौला ने 52 लाख रुपए दान दिए
मौला साहब ने बोहरा समाज की कर्जन हसना कमेटी को 52 लाख रुपए दान दिए। कमेटी द्वारा इन रुपयों को समाज के जरूरतमंद व्यापारी अपने व्यवसाय के लिए बगैर ब्याज के रुपए लेते है। किश्त के रूप में कमेटी हर माह रुपए वापसी लेती है। कमेटी द्वारा लोगों की बीमारी, शिक्षा व बेरोजगार युवकों को रोजगार के लिए भी रुपए दिए जाते हैं।

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