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सोनोग्राफी सेंटर नहीं लिख रहे गर्भवतियों के मोबाइल नंबर, नोटिस देंगे

5 वर्ष पहले
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कलेक्टोरेट में सोमवार दोपहर पीसीपीएनडीटी (गर्भधारण एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक विनियमन तथा दुरुपयोग) अधिनियम की कलेक्टर ने समीक्षा की। कलेक्टर एमके अग्रवाल ने सोनोग्राफी सेंटरों पर गर्भवतियों के अधूरे पते व मोबाइल नंबर न होने पर अफसरों से सवाल किए। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कलेक्टर के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। कलेक्टर ने पता और मोबाइल नंबर नहीं लिखने वाले सोनोग्राफी सेंटरों को नोटिस देने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने जिले के 14 सोनोग्राफी सेंटर की रिपोर्ट रखी। इसमें 10 सोनोग्राफी सेंटरों के रिकार्ड में नाम, पते और मोबाइल नंबर नहीं मिले। हालांकि सभी सोनोग्राफी सेंटर पर ट्रैकर सिस्टम लगाए हैं लेकिन संचालक जानबूझकर मरीजों का रिकार्ड अधूरा अपडेट कर रहे हैं। कलेक्टर ने प्रत्येक मरीज का सोनोग्राफी के वक्त पूरा पता और मोबाइल नंबर लिखने के निर्देश दिए। बैठक में अपर कलेक्टर अनुराग सक्सेना, जिला पंचायत सीईओ अमित तोमर, सिविल सर्जन डॉ. ओपी जुगतावत, पीसीपीएनडीटी के प्रभारी डॉ.पीसी अग्रवाल, डीपीएम आशुतोष घुटे, महबूब खान, जिला मीडिया अधिकारी वीएस मंडलोई शामिल थे।

ट्रैकर से बढ़ा जिले का लिंग अनुपात
जिले के लिंग अनुपात में बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में जिले में एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 926 थी। 2015-16 में लड़कियों की संख्या 934 हो गई है। एक साल में 8 लड़कियों की संख्या बढ़ी।

एक से अधिक लड़कियों वाली माताओं के गर्भावस्था की विशेष निगरानी होगी
सीएमएचओ डॉ. अवास्या ने बताया एक से अधिक लड़कियों की माताओं के गर्भावस्था की विशेष निगरानी होगी। फिलहाल एमसीटीएस में प्रसूता महिलाओं की जानकारी दर्ज हो रही है। अब 3-4 महीने के गर्भ के बाद सोनोग्राफी कराने वाली महिलाओं पर विभाग सतत नजर रखेगा। जिले के सभी प्रसूता केंद्रों से उस क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं की 9वें महीने में प्रसव की जानकारी ली जाएगी। यदि महिला इस बीच किसी सोनोग्राफी सेंटर में जांच कराई हो या गर्भपात हुआ तो उसकी जांच होगी।

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