व्यापारी बोले- इस उम्र में कैसे करें कृषि की पढ़ाई
बीएससी कृषि में स्नातक होने पर ही खाद बीज की दुकान खोलने का लाइसेंस देने का विरोध
भास्कर संवाददाता | खंडवा
कीटनाशक, खाद, बीज, उर्वरक के लाइसेंस के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने का व्यापारियों ने विरोध किया। एक दिन दुकानें बंद रख वाहन रैली निकाली और कृषि मंत्री के नाम का ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
सरकार की कीटनाशक, उर्वरक विक्रेता लाइसेंस के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने पर पूर्व निमाड़ कृषि आदान विक्रेता संघ के तत्वावधान में जिलेभर के खाद बीज विक्रेताओं ने मंगलवार को अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। जिलास्तर पर करीब 60 व्यापारियों ने विरोध में वाहन रैली निकालकर कृषि मंत्री के नाम का ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। व्यापारियों का विरोध है कि शासन ने उन्हें दो साल में बीएससी स्नातक की डिग्री लेकर योग्यता सिद्ध करने के निर्देश दिए हैं जबकि कृषि में स्नातक की डिग्री को चार साल लगते हैं। ऐसे में व्यापारी डिग्री नहीं ले पाएंगे और उन्हें दुकानें बंद करनी पड़ेगी।
600 व्यवसायी, डिग्रीधारी केवल 30
जिले में खाद बीज की दुकानों के लाइसेंसधारी 600 व्यापारी हैं। जिनमें केवल 30 व्यापारी ही ऐसे हैं जिनके पास कृषि स्नातक की डिग्री है। शासन की नई नीति में यह 5% व्यापारी ही बचेंगे जिन्हें दुकानें बंद नहीं करना पड़ेगा।
डिग्री लेने पर ही मिलेगा लाइसेंस
वर्तमान में खाद बीज संचालकों को कृषि डिग्री लेने पर ही दुकानें संचालित करने का लाइसेंस मिलेगा। संचालकों को डिग्रीधारी को नौकरी पर या पार्टनर बनाना होगा। ओपी चौरे, उपसंचालक कृषि
एक्सपर्ट कमेंट
किसानों के लिए फायदेमंद
किसानों को कृषि में उपयोग की जाने वाली दवाईयों, छिड़काव की सही जानकारी मिलेगी। कृषि की पढ़ाई पूरी कर चुके बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। कोई भी व्यक्ति दुकान नहीं खोल सकेगा।
व्यापारियों की यह समस्याएं
उम्र, स्थान व परिस्थितिवश कई व्यापारी 4 साल की नियमित पढ़ाई नहीं कर सकते।
बीएससी डिग्रीधारी को दुकान पर कर्मचारी रख भारी भरकम वेतन देना संभव नहीं।
व्यापारियों की आजीविका छिन जाएगी, जो कि न्याय संगत नहीं।
मेडिकल क्षेत्र में फार्मेसी अनिवार्य करते समय पुराने व्यवसायियों को नियमित रखा था। शासन यहां भी ऐसा कर सकता है।
डिग्री के स्थान पर व्यापारियों को कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग द्वारा ट्रेनिंग की व्यवस्था लागू की जा सकती है।
4 साल में ही मिलती है डिग्री
प्री एग्रीकल्चर टेस्ट पास करने के बाद कृषि कॉलेज में दाखिला मिलता है। दो साल में डिग्री मिलना असंभव है। व्यवसायी दूसरे शहरों से डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में खाद बीज दुकान संचालकों को अपने यहां डिग्रीधारी को कर्मचारी या पार्टनर बनाकर रखना होगा। प्रोफेसर, पीपी शास्त्री, अधिष्ठाता, कृषि कॉलेज
एसडीएम शाश्वत शर्मा को ज्ञापन सौंपते खाद बीज दुकानदार।