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मौला का करम

5 वर्ष पहले
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घर में मौला के कदम पड़े, उनके स्पर्श की हर वस्तु अनमोल हो गई
तीसरे दिन सैयदना साहब पहुंचे समाजजन के घर, एक झलक दीदार के लिए लगी भीड़, मौला की मेहमान नवाजी जिंदगी का बेहद यादगार पल
मौला के कदम रखते ही खुशियों से दामन भर गया। आका मौला की दुआ से गम तो वैसे भी नहीं थे। परवरदिगार का शुक्र कैसे अदा करें कि आज कि मौला ने हमारे घरों पर दस्तक दी। उनके मुबारक कदमों की बदौलत बरकतों से दामन भर गया। सपने में नहीं सोचा था, मौला हमारे घर आएंगे। उनकी मेहमान नवाजी कर लोग खुद की किस्मत का धन्य मान रहे है।

बोहरा समाज के 53वें दाई-उल-मुतलक डॉ. सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन साहब ने शनिवार को बोहरा समाज के जिन लोगों के घरों में अपने कदम रखे मानो उनकी तो किस्मत ही पलट गई। मौला की कदमबोसी कर समाजजन ने खुद को पाक (पवित्र) कर बरकत से दामन भर लिया है। घर में शिरकत के दौरान आका मौला जिस सोफा, कुर्सी पर बैठे उसे बरकत के लिए दर्शनार्थ रखा है। कुछ लोगों ने पैर की जूतियां, पैर के नीचे रखने के तकिये, बैठने की चादर, रुमाल सहित छड़ी को आका मौला का हाथ लगाया। मौला ने जिसे भी छुआ वह बरकती हो गया। सैयदना साहब शनिवार कई घरों में गए। सन गली, घासपुरा, सैफी कॉलोनी सहित क्षेत्र में बोहरा समाजजन की बड़ी संख्या में भीड़ लगी रही।

बरकतों से दामन भर गया : सनगली में मुल्ला नजमुद्दीन सनवाला के घर मौला को विशेष व्यंजन भेंट किया। मौला ने शरबत और व्यंजन का स्वाद लेने के बाद थाली को आगे बढ़ा दिया। सनवाला के बेटे अदनान ने बताया हमारे लिया मौला की एक झलक पाना ही किस्मत की बात थी। घर तक मौला ने दस्तक दी। उनकी आमद से बरकत ही बरकत दामन में फैल गई। मौला के लिए बनाए विशेष सोफा, कवर, चादर, तकिया, जूती को बरकत के लिए घर के हॉल में रख दिया है। दुआ करते है अगली बार भी मौला जल्द हमारे घर तशरीफ लाएं।

सपने में भी नहीं सोचा था मौला आएंगे
जाबिर अली तेजाबवाला ने कहा 65 से ज्यादा की उम्र हो गई। सपने में भी नहीं सोचा था मौला घर तक आएंगे। पोती खतीजा का निकाह मौला के हाथों हुआ। जिंदगी की सबसे बड़ी खुशी मिल गई। मौला के मुबारक कदम के बाद मेरा पूरा परिवार, खानदान बेहद खुश है। छोटे बेटे मुल्ला बुरहानुद्दीन मौला की खिदमत में लगे हुए है। शेख शब्बीर भाई राजा के बेटे इब्राहिम राजा ने कहा मौला की दावत इतनी खुशी की शब्दों में बयां नहीं कर सकता। मेरा पूरा परिवार बेहद खुश है। उनकी बरकत से ही सारे काम होते है। शुक्रवार को मौला की मेहमान नवाजी करने का मौका मिला। अब तक यकीन नहीं हो रहा। हमारे लिए यह एक सपना ही था कि हम मौला की मेहमान नवाजी के लायक बने।

आका मौला जिन घरों में गए वहां उनके दीदार के लिए समाजजन बड़ी संख्या में इंतजार करते रहे।

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