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युवक की इलाज के दौरान मौत, स्वाइन फ्लू की आशंका
अस्पताल में आधे-अधूरे इंतजाम जिम्मेदार मान रहे सब कंट्रोल में
एकगर्भवती की स्वाइन फ्लू से मौत की पुष्टी। इंदौर रैफर तीन लाेगों की रिपोर्ट का इंतजार। बावजूद इसके जिम्मेदार मान रहे हैं कि सबकुछ कंट्रोल में है। उनका कहना है कि जिला अस्पताल में एहतियात सारे बंदोबस्त किए जा चुके हैं। थ्री लेयर मास्क भी गए हैं। ऐसा है तो महज संदेह के आधार पर मरीजों को इंदौर रैफर करने का सिलसिला थम क्यों नहीं रहा है। जांच के लिए एक सप्ताह से ज्यादा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। साफ है स्वास्थ महकमा रोकथाम की जगह रैफर करने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। सिविल सर्जन डॉ. आरके नीमा ने बताया फ्लू से बचाव के लिए आईसोलेशन वार्ड बनाया है। मास्क मंगाए हैं। लोग डरें नहीं, फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण भी देखें तो डॉक्टर को दिखाएं।
15दिनों में 5 मामले, एक की मौत
कसरावदके साटकूर की 28 वर्षीय गर्भवती की मौत के बाद जांच रिपोर्ट में महिला को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। उसे गत सोमवार जिला अस्पताल से इंदौर रैफर किया था। बुधवार उसकी मौत हो गई थी। पंद्रह दिन में स्वाइन फ्लू का यह पांचवां मामला है। इसके पहले बड़वाह के एक पुरुष और लिक्खी में महिला में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई थी। इलाज के बाद दोनों स्वस्थ हैं। अभी डेढ़ वर्षीय बच्ची, 37 वर्षीय महिला और 23 वर्षीय युवती की रिपोर्ट आना शेष है। शुक्रवार कसरावद से खामखेड़ा के एक युवक को स्वाइन फ्लू की आशंका के चलते जिला अस्पताल रैफर किया था। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई हालांकि उसकी पुष्टी नहीं हो पाई है।
सफाई से 40% रोका जा सकता है फ्लू
^स्वाइनफ्लू के वायरस के फैलने का एक कारण गंदगी है। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी को रोककर स्वाइन फ्लू को 30 से 40 फीसदी तक काबू किया जा सकता है। खुद के हाथ धोने से लेकर घर के दरवाजे तक की सफाई पर ध्यान दिया जाए तो वायरस को 10 फीसदी तक रोका जा सकता है। यह एयर ट्रांसमिशन रोग है। इसमें बीमारी फैलने का डर ज्यादा रहता है। गंदगी से इम्युनिटी कम होती है। ऐसे में लोग खुद की, घर की, मोहल्ले की सफाई करके या करवाकर स्वाइन फ्लू का रोकथाम कर सकते हैं। -डॉ.मधुसूदन बार्चे, एमबीबीएस
{ लोगों के संपर्क में रहने वाले कर्मचारियों के लिए थ्री लेयर मास्क उपलब्ध करवाना। {स्वास्थ्य केंद्रों को आदेश जारी करना कि कोई भी मरीज संदेही हो तो सूचना तत्काल दी जाए। {भीड़ वाले क्षेत्रों में स्क्रिनिंग डेस्क शुरू करना। {काॅलोनियों में सर्वे कर पता लगाना कि कोई लंबे समय से बीमार तो नहीं है। {स्वाइन फ्लू के नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले वैक्सीन की डिमांड शासन से करना।
तीन कैटेगरी में स्वाइन फ्लू के लक्षण
कैटेगरी : सर्दी-जुकाम,हल्का बुखार, सिरदर्द।
कैटेगरीबी (1) : जुकामके साथ तेज बुखार, हाथ-पैर में दर्द। बी (2): इन लक्षणों वाले ऐसे मरीज जिन्हें कोई क्रोनिक बीमारी हो, गर्भवती महिला या बुजुर्ग।
कैटेगरीसी : तेजबुखार के साथ सांस लेने में परेशानी, कफ में खून सकता है। मरीज को वेंटीलेटर पर रखना पड़ता है। जोड़ों में तेज दर्द, नाखून नीले होना। इसमें मरीज को टेमीफ्लू देना ही पड़ता है।
जिला अस्पताल में बनाया आईसोलेशन वार्ड, जहां संसाधन नहीं हैं।
{ हाथों को साबुन से या हैंड वॉश से न्यूनतम 20 सेकंड तक धोएं।
{ व्यक्ति जिनमें स्वाइन फ्लू के लक्षण दिख रहे हों, उनसे दूरी बनाकर रखें।
{ भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, जाएं तो मुंह-नाक ढंककर रखें।
{आराम के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीएं, इससे डी-हाइड्रेशन नहीं होगा।
हमें यह रखना होगी सावधानी
भोजन ऐसा हो
{घर का ताजा खाना, ताजे फल और हरी सब्जियां खाएं। पानी खूब पीएं। { मौसमी फल जैसे संतरा, आलूबुखारा, तरबूज के अलावा सेव-अनार अच्छे हैं। { सभी दालें खा सकते हैं। काफी दिन तक फ्रीज में रखी हुई चीजें नहीं खाएं। { नींबू-पानी, सोडा शर्बत, दूध, चाय, फलों के जूस, मट्ठा-लस्सी ले सकते हैं।
संक्रमण ऐसे
{स्वाइनइनफ्लुएंजा-ए वायरस वाले मरीज के साथ हफ्तेभर का संपर्क। {जहां केस मिले हैं, उन इलाकों में जाने के 7 दिन के अंदर बुखार। {ऐसे समुदाय के लोगों से संपर्क, जहां स्वाइन फ्लू के केस मिल चुके हों।
{अनिद्रा की स्थिति, थकान महसूस होना, दवा खाने के बाद भी बुखार।
{मांसपेशियां में दर्द या अकड़न महसूस करना, सिर में
भयानक दर्द।
{सौ डिग्री बुखार, सर्दी-खांसी, बदन-जोड़ों में दर्द, उल्टी और ठंड लगना।
स्वाइन फ्लू श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है। यह ए-टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है। यह वायरस एच1 एन1 के नाम से जाना जाता है। जब मौसमी बुखार का सीजन होता है, तब भी यह वायरस सक्रिय हो जाता है।