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एक इंजीनियर की कमी से अटके 1.25 करोड़ के 50 काम

5 वर्ष पहले
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नपा निर्माण कार्यों की जिस रफ्तार से मंजूरी देती है तकनीकी स्वीकृति (टीएस) के मामले में उतनी ही पिछड़ जाती है। अभी तक 50 से ज्यादा ऐसे स्वीकृत कार्य हैं जिनकी तकनीकी स्वीकृति नहीं हुई है।

नई परिषद के कार्यकाल का एक साल पूरा हो चुका है। इस दौरान 33 वार्डों में 1.25 करोड़ रुपए के निर्माण कार्यों को मंजूरी मिली, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी अधिकांश निर्माण कार्य शुरू नहीं हुए। क्योंकि, मंजूर कामों की तकनीकी स्वीकृति समय पर नपा को नहीं मिल पाती है। नपा अफसरों के मुताबिक हर निर्माण कार्यों की तकनीकी स्वीकृति जरूरी है। तकनीकी स्वीकृति के लिए फाइल इंदौर विभाग के संभागीय कार्यालय भेजना पड़ती है। जहां से स्वीकृति मिलने में चार-पांच महीने लग जाते हैं। इसका खामियाजा नपा पार्षदों को भुगतना पड़ रहा है। मंजूरी के बाद भी पार्षद अपने वार्डों में विकास कार्य नहीं करवा पा रहे हैैं। यहीं हाल जिले के सभी नगरीय निकायों का है। सभी के टीएस इंदौर भेजे जाते हैं। नपा सीएमओ निशीकांत शुक्ला ने बताया यह प्रक्रिया का एक हिस्सा है। तकनीकी अमला पर्याप्त नहीं है। इसलिए टीएम में विलंब होता है। निर्माण कार्यों में देरी तो होती है।

निर्माण कार्यों को पहले नपा परिषद में मंजूरी मिलती है।

कार्यों का एस्टीमेट तैयार होता है।

एस्टीमेट और टीएस के लिए फाइल इंदौर जाती है।

स्वीकृति के बाद एनआईसी फिर टेंडर जारी होते हैं।

टेंडर में आई दरों को परिषद से मंजूरी मिलती है। फिर निर्माण कार्य शुरू होता है।

यह है प्रक्रिया
इंदौर भेजना पड़ता है स्टाफ
टीएस इंदौर भेजना भी नपा के लिए मुश्किल भरा काम होता है। अफसरों के मुताबिक उन्हें स्वयं या फिर बाबुओं के मार्फत टीएस इंदौर भेजना पड़ती है। संभागीय कार्यालय में पूरे संभाग की टीएस आती है। इससे कई बार अफसरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। टीएस स्वीकृत कराना भी मुश्किल काम रहता है।

नपा के कार्यपालन यंत्री गजानंद चौहान का सितंबर 2014 में स्थानांतरण हो गया। इस समय तक निर्माण कार्यों की टीएस नपा में ही मंजूरी होती थी। टीएस के लिए कार्यपालन यंत्री ही अधिकृत होते हैं। फिलवक्त नपा में यह पद रिक्त है। उनकी अनुपस्थिति में टीएस नगरीय प्रशासन के संभागीय कार्यालय इंदौर भेजी जाती है। यहां भी अफसरों की कमी के चलते काम में विलंब होता है। उपयंत्री केके जोशी ने बताया पहले हाथों-हाथ टीएस होती थी, लेकिन अब काफी समय लगता है। परेशानी होती है। निर्माण कार्यों की रफ्तार कम हो गई है।

इंजीनियर के अभाव

में लेटलतीफी
कई बुनियादी निर्माण अटके
वार्ड 12- वार्ड में 3 सीसी सड़क और 2 नालियां स्वीकृत हैं। पांच महीने हो गए है लेकिन कार्यों की टीएस नहीं मिली। इससे एक भी काम शुरू नहीं हो पाया।

वार्ड 23- 4 सीसी सड़क व नाली निर्माण अप्रैल-मई की पीआईसी बैठक में स्वीकृत हुए थे। इसी माह टीएस फाइल इंदौर भेजी, लेकिन स्वीकृति नहीं आई।

वार्ड 27- गोशाला मार्ग सीसी सड़क निर्माण होना है। टीएस फाइल दो महीने से अटकी है। इसके पहले तीन अन्य निर्माण कार्यों की टीएस तीन माह बाद मिल पाई है।

वार्ड 28- दाता हनुमान मंदिर के पास सड़क निर्माण स्वीकृत है। चार महीने पहले तकनीकी स्वीकृति के लिए फाइल इंदौर भेजी थी। लेकिन अभी तक स्वीकृति नहीं मिली।

विकास में रोड़ा
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