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सरकारी लापरवाही ने छीनी मासूम की आंखों की रोशनी, जांच होगी
सरकारीलापरवाही ने 14 महीने के मासूम के आंखों की रोशनी छीन ली। मां कुपोषित बेटे को लेकर झिरन्या के सरकारी अस्पताल में गई थी। लेकिन डॉक्टर ने दो इंजेक्शन लगाकर घर भेज दिया। हालत और बिगड़ी तो मां उसे जिला अस्पताल लेकर दौड़ी। यहां पता चला उसकी आंखों की रोशनी खत्म हो गई, 15 दिन पहले लाते तो आंखें बचाई जा सकती थी। कलेक्टर ने इसे सरकारी मशीनरी की लापरवाही माना। उन्होंने कहा जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी।
झिरन्या तहसील के दलालाबाद का 14 महीने के मासूम के जीवन की रोशनी स्वास्थ्य विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही ने छीन ली। एक पखवाड़ा पहले उसे झिरन्या के अस्पताल में दिखाया। वहां पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती नहीं किया। धीरे-धीरे उसकी आंखें बंद होने लगी। उसके बाद जिला अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों का कहना है कुपोषण से उसके कार्निया खराब हो चुके हैं। इससे आंखें हमेशा के लिए खराब हो गई है। कलेक्टर नीरज दुबे ने दोनों विभागों की लापरवाही को स्वीकार करते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। मां खेलबाई का आरोप है उसने तो समय से पहले अपने कलेजे के टुकड़े को अस्पताल में दिखा दिया था। जब से भर्ती किया है उसकी आंखें बंद हैं। आंसू बह रहे हैं। उसका 12 दिन से इलाज चल रहा है। 31 जनवरी को अधिक तबीयत बिगड़ी तब उसे बड़े अस्पताल लेकर आए। गुरुवार कलेक्टर नीरज दुबेे ने पोषण पुनर्वास केंद्र का जायजा लिया तो हकीकत सामने आई। उन्होंने स्वास्थ्य महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही माना। साथ ही केंद्र प्रभारी डॉक्टर दिव्येश वर्मा, डायटिशियन चंद्रकांता कोठे को बच्चों के बेहतर रखरखाव की हिदायत दी।
कुपोषित बच्चे को भर्ती करने के मानक
{पैरों में सूजन हो। पैरों में दबाकर देखते है गड्ढा कितना होता है।
{ एमयूएसी टेप इसमें 11.5 सेमी से कम भुजा।
{ वजन ऊंचाई का असंतुलन।
जांच कराएंगे
^महिलाएवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। जांच कराएंगे। संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। -नीरज दुबे, कलेक्टर
केंद्र में लापरवाही
^झिरन्यापोषण एवं पुनर्वास केंद्र में बच्चे को उचित समय पर भर्ती नहीं करने से उसकी आंखें खराब हुई है। -सुनील सोलंकी, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास विभाग
डॉक्टरों ने बताई पोषण की कमी
डॉक्टरवर्मा ने कहा, बच्चे के पोषण में विटामिन ए, प्रोटीन आयरन की कमी के कारण कार्निया खराब हो गए हैं। पंद्रह दिन पहले उसे भर्ती किया जाता तो उसकी आंखें खराब नहीं होती।
कलेक्टर श्री दुबे मासूम विकास को देखते हुए।
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