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रिटर्न फार्म नहीं भेजे, सितंबर तक कैसे भर पाएंगे टैक्स

4 वर्ष पहले
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सेलटैक्स कार्यालय में अफसरों के सामने अपनी समस्या रखते व्यापारी।

भास्कर संवाददाता | खरगोन

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को लागू हुए 14 दिन हो गए हैं लेकिन अभी भी व्यापारी इसके प्रावधान व नियमों में उलझे हुए हैं। शुक्रवार को वाणिज्यकर विभाग के वृत्त कार्यालय में हुई कार्यशाला में भी व्यापारियों ने कई सवाल उठाए। चेंबर ऑफ कॉमर्स संगठन के अध्यक्ष कैलाश अग्रवाल ने कहा कि अभी तक जीएसटी रिटर्न फार्म नहीं भेजे गए हैं। 10 सितंबर को पहला जीएसटी रिटर्न भरना है। जब तक फार्म समझ में नहीं आएगा, भरेंगे कैसे। फार्म कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। वेबसाइट पर हर दो दिन में फार्म के प्रारूप बदले जा रहे हैं।

रिटर्न भरने से पहले व्यापारियों को इसे समझना जरूरी है। जल्द फार्म उलब्ध कराए जाएं। वाणिज्यकर विभाग के सहायक आयुक्त रजनीश पटेल ने कहा कि अभी फार्म की कोई जानकारी नहीं आई है। जैसे ही फार्म मिलेंगे व्यापारियों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। रिटर्न भरने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इस दौरान राजू सोमानी, द्वारकादास महाजन, आनंद जैन, गिरीश सोमानी, अनिल रघुवंशी, अजय महाजन, विजय महाजन, कुबेर जोशी, वजिरुद्दीन शेख, कैलाश अग्रवाल, मनजीत सिंह चावला सहित अन्य व्यापारी, वकील व सीए मौजूद रहे।

व्यापारियों ने कहा कि जीएसटी के प्रावधान समझ नहीं आ रहे। बड़े और छोटे व्यापारियों के मन में कई सवाल हैं। कोई भी वकील या अधिकारी इन्हें दूर नहीं कर पा रहा है। कियोस्क सेंटरों की तरह हर तहसील में एक हेल्पडेस्क बनाई जाई।

पेनल्टी अधिकारी नहीं कम्प्यूटर करेगा

संगठन पदाधिकारियों ने पेनल्टी के प्रावधानों पर भी आपत्ति ली। उन्होंने कहा कि कई ऐसे सख्त प्रावधान है, जिनसे व्यापारियों को बेवजह परेशान किया जाएगा। इन्हें दूर किया जाए। अफसरों ने दूर करने का आश्वासन दिया लेकिन पदाधिकारी बोले कि अभी तक दूर नहीं किया। पेनल्टी अधिकारी नहीं कम्प्यूटर बनाएंगे। इसलिए जल्द प्रावधानों में संशोधन किए जाए।

संगठन की येे हैं प्रमुख मांग
सरकार को व्यापारियों के टर्नओवर का डर दूर करना होगा। व्यापार बढ़ता है तो अधिकारी परेशान नहीं करें। एडजसन्ट कोड में वस्तु का क्षेत्रीय नाम भी होना चाहिए। अंग्रेजी नाम लिखा रहता है। कॉटन को कपास लिखना होगा। रिटेलर को 200 रुपए तक सामान खरीदने पर बिल बनाना अनिवार्य है। इसे बढ़ाकर 2 हजार को करना चाहिए। 10 लाख रुपए के स्टॉक पर 5 फीसदी भरने और रिबेट होने का प्रावधान है। लेकिन व्यापारी माल बिकने पर टैक्स देेंगे। अलग से कपास पर एक व बाकी उपजों पर दो फीसदी जीएसटी है। मंडी टैक्स भी शामिल हो। कई उत्पादों के एचएसएल कोड डबल हैं, इसे एक ही करें।

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