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मेले में व्यापारियों ने भगवान नवग्रह का पूजन किया

5 वर्ष पहले
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प्राचीन व ऐतिहासिक श्री नवग्रह मंदिर से गुरुवार को नवग्रह राजा की पालकी ढोल धमाके के साथ निकाली। मंदिर में नवग्रह भगवान का विधि-विधान से पूजन हुआ। इसके बाद पालकी मेले के भ्रमण पर निकली। श्रद्धालु व व्यापारियों ने भगवान की पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालु पालकी के नीचे से गुजरे।

मंदिर के पं. लोकेश जागीरदार ने बताया पूजा-अर्चना के बाद दोपहर में नवग्रह महाराज की शृंगारित प्रतिकात्मक पालकी निकाली गई। पालकी में नवग्रहों के राजा सूर्यदेव रथ के साथ व महालक्ष्मी-नारायण भगवान विराजे। ढोल-ढमाके के साथ भगवान ने मेला भ्रमण किया। जलेबी चौराहा पर आरती हुई। मोदक का भोग लगाया। शाम 6 बजे पालकी मंदिर लौटी। आतिशबाजी के साथ मेले का औपचारिक समापन हुआ।

124 साल पुरानी है पालकी
पं. जागीरदार ने बताया नवग्रह महाराज की प्रतीक पालकी यात्रा की परंपरा 124 वर्ष पुरानी है। मेला प्रारंभ होने के पांचवें गुरुवार पालकी निकाली जाती है। पहले यह मेला मार्गशीर्ष पूर्णिमा से पौष पूर्णिमा तक हिंदू तिथि के अनुसार लगता था। चूंकि अब नगर पालिका मेला अंग्रेजी तारीख से लगाती है अतः अब मेला समापन के पूर्व आने वाले गुरुवार को साप्ताहिक हाट के दिन यह पालकी यात्रा निकाली जाती है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होंगे
मेले का 16 फरवरी को समापन होगा। पिछले दो सालों से मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं हो पा रहे हैं। इस बार भी बिना मनोरंजन कार्यक्रमों के मेले का समापन कर दिया। सीएमओ निशीकांत शुक्ला ने बताया परिषद के निर्णय के बाद कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं।

मेले में महिला श्रद्धालु व व्यापारियों ने भगवान की पूजा-अर्चना की।

पालकी यात्रा
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