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बहुमान कर वरघोड़ा निकाला

7 वर्ष पहले
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श्रीसंघ ने मासक्षण करने वाली तपस्वियों का किया बहुमान

नामकर्मके उदय से अनुकुल रिद्धियां मिलती है। भगवान महावीर के जन्म पूर्व ही इंद्र ने देवताओं के माध्यम से राजा सिद्धार्थ के भंडार भरवा दिए थे। यह बात जैन स्थानक भवन में विराजित प्रवर्तक जिनेंद्रमुनिजी ने रविवार को धर्मसभा में कही। कहा कि लाभान्तराय टूटी हो तो जीवन में धन एवं लाभ नहीं मिल सकता है। पूर्ववत कर्मों के पुण्य से ही संपत्ति मिलती है। मद कशाय से शुभ कर्म का बंध होता है फिर धर्म आराधना कर पुण्य का संचय किया जा सकता है। जिसके ह्रदय में तीव्र शुभ भाव जाते है वह अपने रास्ते आगे बढ़ जाता है और जो मन में प्रण कर लेता है वह लंबी तपस्या कर जाता है। संत गिरीशमुनिजी ने भी संबोधित किया।

श्रीसंघ द्वारा मासक्षमण तपस्वी अलका गांधी (33 उपवास), शांता धोका (31 उपवास), भागचंद चौपड़ा राजपुर (30 उपवास) का बहुमान किया गया। कविता सुमितजी नाहर ने 31 उपवास की तपस्या पूर्ण की, जिनका श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ बदनावर द्वारा अभिनंदन एवं बहुमान किया जाएगा। संघ द्व‌ारा आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसमें शामिल होने के लिए समाजजनों से आह्वान किया है।

शांता धोका

कविता नाहर

अलका गांधी

वरघोडे़ में गरबा करती युवतियां।

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