पिटगारा तिराहा बना डेंजर जोन
लेबड़-जावराफोरलेनपर पिटगारा तिराहा डेंजर जोन बन गया है। यहां आए दिन हो रहे हादसों के कारण ग्रामीण भयभीत हैं। तिराहा क्रॉस करते समय ध्यान चूकने पर हादसे हो जाते हैं। पंद्रह दिनों में दो लोगों की मौत हो चुकी है। इसके पूर्व भी हादसो में कई लोगों ने जान गंवाई। कई बुरी तरह घायल हो गए। फोरलेन पर इंदौर रतलाम रोड से पेटलावद रोड के लिए रास्ता जाता है लेकिन संकेतक के अभाव में चालकों को पता ही नहीं चल पाता और तेज गति से गुजरते समय सामने से रहे दोपहिया, चार पहिया या राहगीर को बचाने में वाहन की गति को नियंत्रित नहीं कर पाने के कारण हादसे हो जाते हैं। तिराहे के पास ही पिटगारा गांव बसा है यहां से भी अन्य गांवों का पहुंच मार्ग होने से आवागमन का दबाव बना रहता है। राहगीरों की भी भारी फजीहत है। ग्रामीणों ने कई बार संकेतक लगाने की मांग की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है संकेतक नहीं लगे तो आंदोलन करेंगे।
इसलिए होते हैं हादसे
तिराहे पर सबसे अधिक हादसे पेटलावद रोड से इंदौर रोड की ओर मुड़ने के दौरान हो रहे हैं। झाबुआ, पेटलावद, थांदला, राजगढ़, गुजरात से इंदौर जाने वाले वाहन भी तिराहे पर जैसे ही मुड़ते हैं कि सामने से तेज गति से गुजरते वाहन की चपेट में जाते हंै। पिटगारा, घटगारा, बोराली, बालोदा, पडुनिया, कनवासा, छौ, दांगीखेड़ी, बुलगारा आदि अनेक गांवों के ग्रामीण भी बदनावर से गांव वापसी के दौरान बाइक से तिराहे को क्रॉस कर गुजरते हैं। इस दौरान सामने से आने वाला वाहन काफी दूर नजर आता है लेकिन रफ्तार का अंदाजा नहीं होने से हादसे का शिकार हो जाते हैं। ग्रामीणों को भी बदनावर, रतलाम, उज्जैन, पेटलावद, राजगढ़ जाने के लिए रोड क्रॉस कर सामने पहुंचना पड़ता है। ऐसे में भी हादसे का भय बना रहता है। राहगीर खासकर महिला, बच्चों एवं बुजुर्गों को अधिक परेशानी रहती है। उज्जैन, देवास, रतलाम आदि शहरों के लोग भी गुजरात, झाबुआ, राजगढ़ जाने के लिए फोरलेन पिटगारा तिराहे से ही पेटलावद हाईवे की ओर टर्न लेते हैं। इस दौरान इंदौर रोड से बदनावर चौपाटी की ओर तेज गति से गुजरते वाहन गति पर नियंत्रण नहीं रख पाते हंै। भारी वाहनों की आवाजाही भी अधिक है।
फोरलेन पिटगारा तिराहे पर आए दिन इस तरह रोड क्रास करने के दौरान होते हैं हादसे।
हादसों पर नियंत्रण: ये आए सुझाव
>रतलाम इंदौर रोड पर स्पीड ब्रेकर बनान