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‘साधना लाती है विषमता से समता में’

6 वर्ष पहले
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जैन स्थानक भवन में धर्मसभा हुई

बदनावर|जिसनेमन पर नियंत्रण कर लिया वह समता भाव में रमण करता है। वह भेदभाव से मुक्त हो जाता है। व्यक्ति को विषमता से समता में आने के लिए साधना का लक्ष्य बनाना चाहिए। यह बात प्रवर्तक प्रकाशमुनिजी ने जैन स्थानक भवन में धर्मसभा में कही। उन्होंने कहा इंद्रियों के विषय से जुड़ी सामग्री भौतिक सुख है। इससे दु:ख उत्पन्न होता है। प्रभु भक्ति, सामायिक, जप एवं तप आदि आध्यात्मिक साधना से जीवन में आनंद की अनुभूति होकर प्रसन्नता बढ़ती है। संत प्रमोदमुनिजी ने कहा रोगी उपचार के लिए अस्पताल जाता है। इसी प्रकार मनोविकारों के निवारण के लिए धर्मस्थलों पर आकर क्षमा, नम्रता, सरलता एवं संतोष के साथ आत्मा को स्वस्थ बनाना चाहिए। साध्वी आदर्शज्योतिजी ने भी संबोधित किया। यहां विराजित 17 संत साध्वीवृंद के संत समागम का जैन समाज प्रतिदिन प्रवचनों का लाभ ले रहा है।