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बामंदाखुर्द में बन रहा मंडोर भैरव बाबा का देवालय

6 वर्ष पहले
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बामंदाखुर्दजैसे छोटे से गांव में करोड़ों रुपए का मंडोर भैरव बाबा का देवालय बन रहा है। उड़ीसा भुवनेश्वर की शैली में निर्माणाधीन देव स्थल का आधे से अधिक कार्य हो चुका है। राजस्थान के कारीगरों द्वारा हाथी, मोर की मूर्तियों पर सुंदर नक्काशी की जा रही है। धोलपुरी पत्थरों पर खुदाई कर भगवान शंकर के प्रत्येक रूप की मनमोहक कलाकृतियां भी उकेरी जाकर सप|ीक 10 दिगपालों की आकृतियां का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। मंदिर 44 खंभों का काम पूर्ण हो चुका है। प्रत्येक खंबे की लागत ढाई लाख है। छत के लिए 84 पाट का रूप भी पत्थरों का दिया जाने का काम जारी है। एक पाट की कीमत 56 हजार के करीब है। मंदिर में 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना की जाएगी। पिंक कलर के शिवलिंग जलाधारी के लिए स्फटिक ब्राजील से मंगाए गए हैं। सभा मंडप में अनेक मुद्राओं में पुतलियां कत्थक नृत्य करती दिखाई देंगी। अष्टकोण में रासलीला करते हुए दिखाई देंगे। शिवजी को तांडव करते दिखाया जाएगा। भूगर्भ के दक्षिण में गणेशजी, पश्चिम में अर्धनारीश्वर, उत्तर में कार्तिकेय की मूर्तियां स्थापित की जा चुकी है। अंदर एक मुंह का यंत्र जो कि पूरा एक ही पत्थर पर खुदाई कर उकेरा गया है, जिसकी लंबाई चौड़ाई 11 फीट 11 इंच है।

यूंआती है निर्माण राशि-यह निर्माणईश्वरचंद विद्यासागर के प्रयासों से जारी है। राशि अकेले ईश्वरचंद गांव-गांव जाकर एकत्रित कर रहे हैं। ईश्वरचंद विद्यासागर ने बताया 1987 से साईटिका, पत्थरी जैसी बीमारियों का इलाज करते हैं। गंभीर हालात में भी लाए गए मरीज को लाभ मिलने पर उनके द्वारा राशि दान दी जाती है, जिसका रिकॉर्ड रख मंदिर निर्माण कार्य में लगाते हैं। मंदिर निर्माण के बाद आने वाले धर्मालुओं के लिए ठहरने के लिए धर्मशाला निर्माण की भी योजना है।

बदनावर. बामंदाखुर्द में निर्माणाधीन मंडोर भैरव बाबा का मंदिर।