ठाकुरजी को 56 भोग लगाया
ठाकुरजी को 56 भोग लगाया
बड़वाह. मनुष्यका स्वभाव उसके मन और विचारों पर निर्भर करता है। जो जितना तुच्छ मानसिकता का होगा, उसका अहम उतना ही ऊंचा होगा। यह बात जैन धर्मशाला में चल रही भागवत कथा के दौरान कथावाचक पंडित अशोक कृष्ण जी महाराज ने कही। कथावाचक ने कृष्ण की बाललीलाएं, पूतना वध, गोवर्धन प्रसंग आदि का सुंदर वर्णन किया। ठाकुरजी को महाआरती के पश्चात 56 भोग लगाया।