जिसे पीटकर निकाला, उसे पहनाई माला
9 साल से अलग रह रहे दंपती 9 मिनट में हो गए हमसफर, हंसी-खुशी पौधा लेकर लौटे
समझौते से निपटाए प्रकरण, पक्षकारों को वकील, दलील अपील से छुटकारा मिला
भगवानपुरा थरपुर के सुनील ने कुछ दिनों पहले प|ी सीमा के साथ मारपीट कर सिर्फ इसलिए घर से निकाला था कि वह उसे बिना बताए मायके चली गई। पति-प|ी के विवाद में बड़ी बेटी रेखा (2) दूधमुंही बच्ची अंजली (1) की परवरिश प्रभावित हुई। सीमा ने भगवानपुरा थाने पर एफआईआर की। आखिरकार शनिवार को मेगा लोक अदालत में दोनों आए। सुनील ने पुरानी बातें भुलाई और सीमा को फूलमाला पहनाकर घर ले गया। माता-पिता का प्यार दोनों बेटियों को फिर मिला। यह राजीनामा मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लीलाधर सोलंकी की अदालत में हुआ। श्री सोलंकी ने दोनों को पौधा दिया। कहा- झगड़ा मत करना, बच्चों को पढ़ाना, अच्छे रहना। ऐसे ही कई मामले शनिवार को 13 खंडपीठ वाली मेगा लोक अदालत में निपटे। राजनामे के बाद किसी का परिवार बसा तो किसी को जीवन जीने का आधार मिल गया। पारिवारिक विवादों के साथ ही लोक अदालत में बिजली कंपनी, बीएसएनएल, नगरपालिका, और बैंकों से संबंधित मामले भी सुलझे। लोक अदालत की शुरुआत न्यायाधीश सुरभि मिश्रा, एलडी सोलंकी, जाकिर हुसैन, विनीता भटनागर, शिवचरण पटेल, लक्ष्मी वास्कले आदि ने की। इस दौरान अभिभाषक संघ जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण बर्वे, उपाध्यक्ष देवेंद्र पाठक, सचिव नीरज पाठक, पवन बिल्लौरे, युवराज गुजराथी, दीपक कानूनगो आदि मौजूद थे।
लोक अदालत में करीब 10 मामले टूटे हुए परिवारों से संबंधित थे। राजीनामा के बाद ये परिवार एक बार फिर जुड़ गए। ऊन के पास पनवाड़ा में बद्री ओंकार के बीच जमीन विवाद दो साल पुराना था। दोनों का राजीनामा हुअा। इसी तरह बरूड़ थाने के सतीपड़ावा निवासी भाइला उसकी प|ी स्याणीबाई में भी विवाद था। दो साल से अलग-अलग रहते थे। उनका विवाद भी लोक अदालत में सुलझा।
लोक अदालत में पौधों की बंदरबांट, मुंह देख बांटे
लोकअदालत में चेहरा देख टीका लगाने वाली कहावत भी चरितार्थ हुई। वन विभाग द्वारा उन लोगों को पौधे दिए जाना थे जिनका राजीनामा हुआ है, लेकिन पहचान वालों को पौधे देेने की बात भी सामने आई।
आष्टा में विवाद के बाद एसपी ने देखी व्यवस्थाएं
एसपीअमितसिंह ने भी लोेक अदालत का जायजा लिया। उन्होंने कहा आष्टा में लोक अदालत के दौरान विवाद हो गया। नौबत मारपीट तक पहु