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सरकारी सेवा कमजोर, झोलाछापों का जोर

7 वर्ष पहले
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दूधीमेंझोलाछाप के यहां छापे के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उदासीनता उजागर हो गई है। हालातों ने झोलाछापों को पैर पसारने का मौका दिया है। बड़वानी, खरगोन धार जिले के सैकड़ों गांवों का केंद्र होने के बावजूद धामनोद के सामुदायिक अस्पताल में जरूरी सुविधाएं नहीं होने से स्थिति उत्पन्न हुई है। सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने से लोग झोलाछापों के चंगुल में फंस रहे हैं। हर गांव में दो से तीन झोलाछाप पनप गए हैं और लोगों की जान से खेल रहे हैं।

धामनोद अस्पताल में जरूरी संख्या में पलंग है सफाई व्यवस्था। पीने के पानी के लिए मात्र एक टंकी है। सोनोग्राफी मशीन तक नहीं है। उचित विद्युत व्यवस्था के नाम पर लगाए दो बड़े जनरेटर सेट में भी डीजल डलवाने का फंड नहीं है। डॉक्टरों के अभाव में लोगों को घंटों डॉक्टरों को दिखाने के लिए खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता है। प्रतिदिन तकरीबन 200 से 250 ओपीडी होती है। पदस्थ डॉक्टरों में डॉ. प्रकाश कियावत शारीरिक रूप से कमजोर हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय पाटीदार को ओपीडी के साथ डिलेवरी केसेस भी देखना पड़ते हैं। रोजाना तकरीबन 10 डिलेवरी होती हैं। जरूरत पड़े तो पोस्टमार्टम भी करना पड़ता है। इनके अलावा अन्य पदस्थ डॉक्टर सारा खेशगी हैं जो पारिवारिक कार्य से छुट्टी पर थी, शुक्रवार को लौटी। डॉक्टर पाटीदार को तो पीछले कुछ दिन 36-36 घंटे ड्यूटी करना पड़ी पहले शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. वाजिद खेशगी थे जिन्होंने 8 माह पूर्व वीआरएस ले लिया। उनकी जगह पर अभी तक कोई पदस्थ नहीं किया गया। डॉ. सुरेखा जैन को धरमपुरी पदस्थ कर दिया गया। जल्द ही नगर में नए डॉक्टर की पदस्थापना नहीं हुई तो समस्याएं और बढ़ेंगी। धामनोद एबी रोड पर होने के कारण क्षेत्र ही नहीं बल्कि आसपास के भी एक्सीडेंटल केस यहां आते हैं। उमरबन ब्लॉक, धरमपुरी ब्लॉक, ठीकरी, कसरावद, महेश्वर, मंडलेश्वर आदि क्षेत्र से भी मरीज यहां आते रहते हैं। उचित इलाज नहीं मिल पाने के कारण क्षेत्र की जनता को मजबूरी में झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है।

खुद बीमार पर रोज देख रहे 150 मरीज

झोलाछाप के यहां जितनी दवाएं, उतनी तो सरकारी अस्पताल में नहीं

विशेषज्ञों की नियुक्ति भोपाल से होती है

^एकडॉक्टर का आदेश कर चुकी हूं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति भोपाल से होती है। डॉ.वंदना खरे, सीएमएचओधार

धामनोद. डॉक्टर