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नर्मदा के दर्शन मात्र से सात जन्मों के पाप धुल जाते हैं

5 वर्ष पहले
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नर्मदा की स्वच्छता का संकल्प लिया
नर्मदा पुराण कथा के समापन पर अखिलेश्वरी देवी ने कहा

अंजड़ | मां नर्मदा पतित पावन और अखंड कुंवारी है। इसका हर कंकर शंकर के रूप में पूजा जाता है। इसके दर्शन मात्र से सात जन्मों के पाप धूल जाते हैं। ऐसी पुण्य सलिला मां की कथा सुनने और कहने में हमारी पूरी जिंदगी निकल जाएगी लेकिन मां की महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता है।

नर्मदा तट किनारे ग्राम बड़दा में आयोजित मां नर्मदा पुराण कथा के समापन पर बागदी आश्रम से आई माता अखिलेश्वरी देवी ने नर्मदा जयंती पर यह बात कही। उन्होंने मां नर्मदा के घाटों को साफ रखने, नर्मदा में साबुन शैंपू का उपयोग न करने, कपडे़ नहीं धोने व नारियलों की नट्टी को जला कर नष्ट करने पॉलीथिन का उपयोग न करने तथा घर का पूजा पाठ का सामन नर्मदा में प्रवाहित न करने का संकल्प दिलवाया। नर्मदाजी के घाटों का वर्णन करते हुए झगड़िया मंडी, हनुमान टेकरी और विमलेश्वर का वृतांत सुनाया। गो हत्या होने के कारण आज पूरे विश्व में कही भूकंप कही तूफान तो कही सुनामी जैसी कई प्राकृतिक आपदा आ रही है। विश्व शांति के लिए उन्होंने गो हत्या न करने का आह्वान किया। कथा समापन के बाद हजारों श्रद्धालुओं ने कथा स्थल से नर्मदा तट तक शोभायात्रा निकाल कर मां नर्मदा की पूजा अर्चना व दूध से अभिषेक कर माँ नर्मदा को 2700 फीट की चुनरी ओढ़ाई। आरती कर कथा स्थल पर हवन किया गया। पूर्णाहुति के साथ भंडारा प्रसादी का वितरण हुआ।

मां नर्मदा को 900 मीटर की चुनरी ओढ़ाते श्रद्धालु।

मां नर्मदा की पूजा कर 900 मीटर की चुनरी ओढ़ाई
अभिषेक, पूजन, हवन के बाद आरती की गई।

अंजड़ | मोहीपुरा में मां रेवा आश्रम समिति के तत्वावधान व बागदी आश्रम से आई साध्वी अखिलेश्वरी माताजी के सानिध्य में पूजन कर मां नर्मदा को 900 मीटर चुनरी ओढ़ाई गई। नर्मदा तट पर स्नान के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगने लगा। सुबह 6 बजे मंत्रोच्चार के साथ नर्मदा का पूजन किया। मुख्य यजमान इंदौर के कैलाश पाटीदार थे। मां नर्मदा का दूध से महाभिषेक कर आरती की गई। 1001 कन्याओं का पूजन कर कन्या भोज के बाद प्रसादी का वितरण किया। जो शाम तक चलता रहा। शाम 6.30 बजे से श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में दीपदान किए। इस दौरान स्वामी विवेकानंद के गुरु भाई स्वामी अमृतानंदजी के शिष्य विक्रमजी मौर्य व क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं भी उपस्थित थे।

अखिलेश्वरी देवी की उपस्थिति में नर्मदा पूजन करते श्रद्धालु।

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