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गंगा में स्नान करने से जो फल मिलता है वह नर्मदा जल के दर्शन मात्र से मिल जाता है

7 वर्ष पहले
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मोरतलाई में नर्मदा कलश यात्रा निकाली

मांनर्मदा का अस्तित्व कभी खत्म नहीं हो सकता है। यमुना में 108, गंगा में 3 बार स्नान का जो फल मिलता है। वह नर्मदा के जल के दर्शन मात्र से मिलता है। इसके लिए मां नर्मदा को कलयुग की गंगा कहा गया है। नर्मदा के जल से पत्थर भी शिवलिंग का आकर ले लेते हैं। यह पावन कलश हमारे गांव को भी पावन कर देगा।

मां नर्मदा हिंदू सम्मेलन के तहत नर्मदा कलश के वितरण के अवसर पर 1008 संतश्री राघवेंद्र महाराज ने कही। गुरुवार को गायत्री मंदिर सभागृह में मां नर्मदा कलश का पूजन वितरण समारोह आयोजित किया। इसमें नर्मदा पुराण कथावाचक 1008 संतश्री राघवेंद्र महाराज बड़वानी, संत बजरंग दास महाराज नागलवाड़ी, मां नर्मदा हिंदू सम्मेलन विभाग संयोजक राधेश्याम पाटीदार तहसील संयोजक अशोक राठौर ने मां नर्मदा के कलश का पूजन किया। अतिथियों का स्वागत धर्मरक्षा समिति के संतोष गुप्ता, दिनेश तिवारी, मदन बघेल, विजय गौरे ने तिलक लगाकर श्रीफल भेंट कर किया।

संत बजरंगदास महाराज ने कहा विदेशी संस्कृति ने हमारे भोजन को भी दूषित कर दिया है। श्रीराम ने शबरी के झूठे बैर सुदामा के कच्चे चावल ग्रहण कर दुनिया को संदेश दिया कि हिंदू समाज में कोई अछूता नहीं है। विभाग संयोजक राधेश्याम पाटीदार ने मां नर्मदा हिंदू सम्मेलन के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मां नर्मदा के कलश को महिलाओं ने सिर पर रखकर कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा गायत्री मंदिर से शिव मंदिर, एबी रोड, दुर्गा मंदिर, सांई मंदिर, बस स्टैंड से होती हुई श्री रामकृष्ण मंदिर पहुंची। कलश यात्रा का पुष्पवर्षा के साथ स्वागत किया। मां नर्मदा के कलश के साथ ग्राम की मिट्टी ग्राम गंगा (जल) की स्थापना भी की गई। यह से 30 ग्रामों के धर्म रक्षा समिति के सदस्यों को नर्मदा कलश का वितरण किया। जिला कार्यवाह दीपक शर्मा, ग्राम विकास प्रमुख अशोक बागुल, तहसील प्रभारी सचिन सैते, सुनील कौशल, संतोष पटेल, सुरेश साहू, अनिल जायसवाल, सुभाष शर्मा, संदीप चौहान, प्रवीण परिहार, गोपाल साहू, सरपंच मालती वर्मा, जनपद उपाध्यक्ष मायादेवी यादव सहित ओझर, बालसमुद, सालीकला, बाजड़, अगलगांव, निहाली, बासवी, ठान, रेलवा, रेलवा बुजुर्ग सहित 30 ग्राम की धर्म रक्षा समिति के सदस्य थे।

कलश यात्रा के दौरान पूजा करते ग्रामीण।

नर्मदा कलश सौंपते संत बजरंगदास महाराज।

नगर भ्रमण करती मा