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मन मेरा मंदिर, शिव मेरी पूजा... से गूूंजा किला

7 वर्ष पहले
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महेश्वर|नर्मदा तटपर निमाड़ उत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को जनपदीय कवि सम्मेलन हुआ। मप्र का बधाई एवं नोरता नृत्य गायिका कविता पौडवाल ने शिव भजनों से मंत्रमुग्ध कर दिया। देर रात तक श्रोता कार्यक्रम का आनंद लेते रहे। जनपदीय कविता की शुरुआत में मंडलेश्वर के विष्णु फागना ने शारदा माय लागू थारां पाय... की प्रस्तुति दी। निमाड़ी रचना विजय जोशी ने कसो थो कसो हुई गयो म्हारा निमाड़ को गांव.. शिशिर उपाध्याय ने रात पानी तारा उठी आया, नर्मदा जी दीपक सिराया... सुनाई। मालवा से आए राजेश रावल ने मां क्षिप्रा से मिलवा चली नर्मदा माई कई केणू केसो मालवा को सुभाग..., नारायण गुप्ता ने सपना मत देखो अपणा घर देखो..., उदयसिंह अनुज ने ऊंची-नीची फाकोज शरम नी आवती, झूठ परदो नाखोज शरम नी आवती..., जगदीश जोशीला ने जय हो प्रजातंत्र की अपना बोट का मंत्र... की प्रस्तुत की। कवि सम्मेलन के बाद देर रात को हुई बधाई और नोरता नृत्य को दर्शकों ने खूब सराहा। लोक दर्पण सांस्कृतिक संस्थान सागर की निदेशिका नवीता चौबे के डायरेक्शन में 20 कलाकारों ने बधाई नृत्य की विभिन्न प्रस्तुतियां दी।

तीज-त्योहारों एवं शादी-ब्याह में किया जाने वाले बधाई नृत्य में राम जन्म लिए रघुवीरा अवध में बाजै बधईया.. एवं तीज त्योहारों में उमंग के दौरान गाए जाने वाले गीत मार-मार लठिए चठाई दिए खटीए बीच में विद्या मताई बिटीए के साथ नैना बंध लागे कहिए... की प्रस्तुति दी। नृत्य में विभिन्न वाद्ययंत्र ढापला, नगड़िया, लोटा, बांसुरी, ढोलक का प्रयोग किया गया। दल ने अपनी अन्य प्रस्तुतियों में नोरता नृत्य भी प्रस्तुत किया। नृत्य में कुंवारी कन्याओं के खेल की प्रस्तुति हुई। किवदंती के अनुसार स्वाटा नामक दैत्य के संहार के लिए कन्याओं द्वारा नवरात्रि में माता की आराधना के लिए नोरता का व्रत किया गया। प्रसन्न होकर माता ने दैत्य का संहार किया। तभी से इस व्रत को कुंवारी कन्याएं करती हैं। नौ युवतियों द्वारा इस नृत्य की सुंदर प्रस्तुति दी गई। नोरता के गांव में राधा-रानी आई है

निमाड़ उत्सव