गुड़-सरस व चूने से बनेगा मंदिर का गुंबद
सिंहस्थ के पहले पवित्र नगरी में तेजी से मंदिर, छत्री व घाटों का सुधार चल रहा है। तिल बाणेश्वर मंदिर की गुंबद की गुड़-सरस व चूने से मरम्मत की जाएगी।
नर्मदा तट पर काशी विश्वनाथ घाट के पास स्थित तिल बाणेश्वर मंदिर की गुंबद नर्मदा की बाढ़ से कई साल पहले क्षतिग्रस्त हुआ था। मंदिर की शिलाओं में आई दरारों को भी बंद किया जा रहा है। इस तरह के मरम्मत की खास बात है कि निर्माण के समय जिस तकनीक से शिलाओं को जोड़ा गया था, मरम्मत के लिए भी उसी तरह का मिश्रण तैयार किया गया है। 2.63 लाख रुपए की लागत से मंदिर का गुंबद बन रहा है। आरईएस सब इंजीनियर अशोक शर्मा ने बताया तिल बाणेश्वर मंदिर के गुंबद में पतली ईंटों को देशी मटेरियल से जोड़ा जा रहा है। इससे वर्षों तक मजबूती बनी रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है सीमेंट निर्माण की अधिकतम अवधि 100 साल तक होती है। इस मिश्रण के उपयोग से निर्माण दोगुनी अवधि तक टिकाऊ रहता है।
ऐसे बनाया
मटेरियल
एक बार में 50 किलो गुड़, 125 लीटर पानी, 30 किलो सरस व पानी मिलाकर उबाल रहे हैं। इसे 8 बोरी कली के चूने, 9 तगारी रेत, 2 तगारी ईंट के चूर्ण के साथ मिलाया जा रहा है। इस मिश्रण को जुड़ाई में उपयोग ले रहे हैं। इस मिश्रण से तिल बाणेश्वर मंदिर की गुंबद की मरम्मत की जा रही है।
7 फीट की ऊंचाई के
बाद गुंबद बनेगा
तिल बाणेश्वर मंदिर के ऊपरी भाग में 7 फीट तक ईंट की जुड़ाई की जाएगी। इसके बाद पुराने पत्थरों की कटिंग कर गुंबद बनाया जाएगा। मथुरा के ठेकेदार महावीरसिंह के साथ सुखवीरसिंह व अन्नुसिंह काम कर रहे है। बल्लु मराठा व टीम पुरानी पद्धति से मटेरियल तैयार कर रही है।
नर्मदा तट पर बने तिलबाणेश्वर मंिदर का बना रहे गुंबद।