पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • मनुष्य को अपमान, उपेक्षा व बुराई नहीं करना चाहिए

मनुष्य को अपमान, उपेक्षा व बुराई नहीं करना चाहिए

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
महेश्वर | ज्ञानी से ज्ञानी चित्त को भी जो अपनी ओर आकर्षित कर ले, उसे योग माया कहते है। जिसे देह का भी ज्ञान नहीं उसे विदेह कहते है। मनुष्य को किसी को देखकर अपमान, उपेक्षा व बुराई नहीं करना चाहिए। यह बात नर्मदा पुराण कथा के पांचवे दिन पंडित शैलेंद्र शास्त्री ने कही। उन्होनें कहा शरीर की तीन अवस्था होती है। जो घड़ी के समान काम करता है। इसमें बचपन सेकंड की सुई के समान तेज, जवानी मिनट की तरह गति से और बुढापा घंटे की सुई के समान धीमी चाल से आगे बढ़ता है। दोपहर 3 से 6 बजे तक चलने वाली कथा में बड़ी संख्या मंे शृद्धालु पहंुच रहे है। कथा में मां रेवा आरती समिति के मोहन यादव, पं. प्रदीप शर्मा, गोपीकिशन पटेल, हरिश दुबे आिद मौजूद थे।

खबरें और भी हैं...