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इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं मरीज, स्वास्थ्य की ये कैसी गारंटी

7 वर्ष पहले
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नरवर में निजी क्लीनिक पर लगी मरीजों की भीड़।

खाली पड़ा नरवर का सामुदायिक सवास्थ्य केंद्र।

योजना के प्रचार के लिए लगाए गए हैं होर्डिंग

दावा

मजबूरी

हकीकत

डॉक्टर, स्टाफ, कैसे हो इलाज

झोला छाप डाॅक्टरों से कराना पड़ रहा इलाज

जांच और दवाएं सब मुफ्त

वायरल इंसेफेलाइटिस हो सकती है 11 लोगों की मौत की वजह

सरकारी अस्पतालों में इलाज होने पर लोगों को अपने खर्च पर झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। खडीचा के भरत रावत उसके तीनों बच्चों ने जब नरवर निजी क्लीनिक पर इलाज कराया तो चारों को मलेरिया पॉजीटिव निकला। यदि किसी की ज्यादा तबीयत खराब हो जाए तो उसे अपने खर्चे पर एंबुलेंस बुलाना पड़ती है।

झंडा गांव में बीमारी से नौ मौतें हो गई। चार ने इलाज के अभाव में दम तोड़ा। दो सौ से अधिक मरीजों को ग्वालियर, झांसी, शिवपुरी में भर्ती कराया गया। जबकि झंडा गांव के सबसे नजदीकी नरवर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर कोई मरीज भर्ती ही नहीं हुआ। जांच तक नहीं हो पा रहीं। क्योंकि तो डॉक्टर हैं और ही प्रशिक्षित स्टाफ।

देश में मप्र ऐसा पहला राज्य है, जो मरीजों के स्वास्थ्य की गारंटी लेता है। रोजाना पचास लाख मरीजों को निशुल्क दवा और पैथोलॉजी जांच की सुविधा मिल रही है। प्रदेश सरकार का दावा कि सरकारी अस्पतालों में हर मरीज को देखभाल और प्यार के साथ समय पर निशुल्क इलाज मिल रहा है।

शिवपुरी के झंडा गांव में बीमारी से नौ मौतों के बाद नयागांव और नाद में दो ने दम तोड़ा