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झंडा गांव की मनीषा ने ग्वालियर में तोड़ा दम
झंडागांव की 12 वर्षीय मनीषा सेन ने मंगलवार की रात ग्वालियर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। गांव में बीमारी से मरने वालों की संख्या सात तक पहुंच गई है। खासबात यह है कि सात मौतों में से चार प्रशासनिक अफसर डॉक्टरों की टीम के सामने हुई, बावजूद इसके जिम्मेदार अफसर और जिले की प्रभारी मंत्री इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की तरह बुधवार को प्रभारी मंत्री ने झंडा गांव में बीमारी से मरने वालों की मौत का कारण सर्पदंश आत्महत्या बताया। उधर स्वास्थ्य विभाग अब तक बीमारी से मरने वालों का पता नहीं लगा पाया है। सीएमएचओ का कहना है कि अब ग्वालियर की टीम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।
बीएमओने कहा,वही प्रभारी मंत्री ने दोहराया: 11सितंबर को दैनिक भास्कर ने झंडा में तीन मौत गांव बीमार, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। जब संवाददाता ने 10 सितंबर की शाम नरवर बीएमओ डॉ. मुकेश गुर्जर से चर्चा की तो उन्होंने बताया था कि गांव में दो लोगों की सर्पदंश से मौत हुई है और एक ने आत्महत्या की है। अब जबकि डॉक्टरों के सामने 4 मौत हो चुकी हैं, लेकिन सात दिन बाद प्रभारी मंत्री कुसुम महदेले ने भी वही पुरानी बात दोहरायी, जो सबसे पहले बीएमओ नरवर ने सुनाया था।
जिला अस्पताल में झंडा गांव के मरीज से हालचाल पूछतीं प्रभारी मंत्री।
जिला अस्पताल में रह गए छह मरीज :मंगलवार तक जहां झंडा गांव के 118 मरीज जिला अस्पताल में उपचार करा रहे थे, वहीं बुधवार की शाम केवल छह मरीज ही रह गए। बीते दो दिन में जिला अस्पताल से ग्वालियर रैफर किए गए दो मरीजों की मौत होने के बाद से भर्ती मरीज डर गए। जिसके चलते वे बुधवार की सुबह से ही अस्पताल छोड़ने लगे। जब शाम को प्रभारी मंत्री अस्पताल पहुंची तो वहां बमुश्किल 15 मरीज रह गए थे और देर शाम यह आंकड़ा महज छह पर आकर सिमट गया। वहीं जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. गोविंद सिंह का कहना है कि हमने 11 मरीज ग्वालियर रैफर कर दिए और लगभग 23-24 मरीजों को डिस्चार्ज कर दिया।
चार मौतें डॉक्टरों के सामने हुईं
{11 सितंबर को झंडा गांव की हेमा (20) पुत्री जसवंत ठाकुर को एसडीएम करैरा एके चांदिल ने नायब तहसीलदार की गाड़ी से रवाना किया। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
{ 12 सितंबर को बेटू (16) पुत्री मनीराम सेन ने जिला अस्पताल में इलाज के दौरान बेहोशी की हालत में दम तोड़