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मार्कशीट में नंबर बढ़ाकर फेल छात्रा को किया पास
जीवाजीयूनिवर्सिटी में उत्तर पुस्तिकाओं में हेराफेरी कर फेल छात्रा को पास करने और फर्जी मार्कशीट बनाने का मामला शुक्रवार को सामने आया है। बीएससी पांचवें सेमेस्टर में वीआरजी कॉलेज मुरार की छात्रा के इंडस्ट्रियल माइक्रो बाॅयोलॉजी के पहले पेपर में नौ नंबर आए थे। सर्विस प्रोवाइडर ने इसे बढ़ाकर 17 कर दिया। वहीं दूसरे पेपर में सात से बढ़ाकर 19 नंबर कर दिए। गोपनीय विभाग के अधीक्षक हरीश शर्मा के पास मार्कशीट साइन होने आई, तब मामले का खुलासा हुआ।
जेयू की करेक्शन सेल में कार्यरत प्रशांत दुबे पर आरोप है कि उसने वीआरजी कॉलेज मुरार की बीएससी की छात्रा प्रियंका नरवरिया से रुपए लेकर उसे पांचवे सेमेस्टर में फर्जी तरीके से पास कर फाइनल सेमेस्टर की मार्कशीट बनाई है। प्रशांत ने पांचवें सेमेस्टर की मार्कशीट तैयार कर बीएससी के इंचार्ज बृजभान भदौरिया के साइन करा लिए। इसके बाद सर्विस प्रोवाइडर ने बीएससी फाइनल की मार्कशीट भी तैयार कर ली। बीएससी फाइनल की मार्कशीट के साथ पांचवें सेमेस्टर की फर्जी तरीके से तैयार की गई मार्कशीट की फोटोकॉपी लगाकर अधीक्षक हरीश शर्मा के पास साइन करवाने भेज दी। सर्विस प्रोवाइडर ने अधीक्षक को बताया कि छात्रा का पांचवें सेमेस्टर का रिजल्ट क्लियर नहीं होने के कारण छठवें सेमेस्टर के रजिस्टर पर रोक लगी थी। अब छात्रा का पांचवें सेमेस्टर का रजिस्टर क्लियर हो चुका है। इसलिए उसे फाइनल की मार्कशीट प्रदान करने के लिए आवेदन लाया हूं।
आरोपी को हटाया
^बीएससीपांचवें सेमेस्टर में छात्रा के फर्जी तरीके से अंक बढ़ाने का मामला सामने आया है। जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी। रिपोर्ट आने पर एफआईआर दर्ज होगी। आरोपी प्रशांत दुबे को तत्काल हटा दिया है।^ प्रो.डीडी अग्रवाल, परीक्षा नियंत्रक, जीवाजी यूनिवर्सिटी
अधीक्षक को मार्कशीट देखकर शंका हुई। उन्होंने पांचवें और फाइनल सेमेस्टर के अंक चार्ट मंगवाए। जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई। अधीक्षक सर्विस प्रोवाइडर प्रशांत को परीक्षा नियंत्रक प्रो. डीडी अग्रवाल के पास ले गए। यहां मौजूद कर्मचारियों ने सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि प्रशांत ने और भी गड़बड़ियां की होंगी। इसकी जांच कर कार्रवाई की जाए।
दोकर्मचारियों के भी साइन: प्रियंकाकी पांचवें सेमेस्टर की मार्कशीट में चेकर के तौर पर कर्मचारी अनिल जामदार चेतन राजौरिया के साइन हैं। इन्होंने जांच किए बिना साइन क्यों किए, यह जांच का विषय है। चुनाव ड्यूटी में होने के कारण इनसे पूछताछ नहीं हो सकी। मौजूद कर्मचारियों का कहना है कि ये साइन भी प्रशांत दुबे ने किए होंगे।