भगवत नाम का चिंतन करना जरूरी
भगवत नाम का चिंतन करना जरूरी
नेपानगर: कलयुगमें मनुष्य अल्पायु है। सतयुग, त्रेतायुग और द्वापर युग में मनुष्य दीर्घायु होते थे। वे योग, यज्ञ, तप सहित अन्य साधनों के माध्यम से प्रभु की शरण प्राप्त करते थे। इसलिए मनुष्य को जीवन में भगवत नाम चिंतन करना जरूरी है। कलयुग में मानव कल्याण का सबसे सरल और सहज मार्ग ईश्वर का चिंतन है। लेकिन कलयुग में मानव की आयु बहुत कम है। उसके पास योग, यज्ञ, भक्ति के लिए पर्याप्त समय नहीं है। ईश्वर साधना और भक्ति चिंतन ही मोक्ष दिला सकता है। ग्राम अंधारवाड़ी में चल रहे श्रीमद भागवत ज्ञान गंगा सप्ताह के दूसरे दिन बुधवार को पंडित एकनाथ महाराज ने यह विचार व्यक्त किए।