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वन अमले ने घर में फेंकी थैली, खोली तो निकले जानवर के सींग-खाल

7 वर्ष पहले
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वन विभाग द्वारा फरार आरोपी बताकर गिरफ्तार किए गए कौडिया कुंड निवासी करसन पटेल के मामले में नया मोड़ आया है। करसन के परिजन ने वन विभाग पर उसे झूठे आरोप में फंसाने का आरोप लगाया है। शनिवार को नेपानगर विधायक राजेंद्र दादु करसन के परिजन से मिलने कौडिया कुंड पहुंचे। परिजन ने विधायक से कहा करसन को झूठे मामले में फंसाया गया है। करसन की प|ी सीताबाई, बेटे अनारसिंग और नारायण ने बताया गुरुवार सुबह 8 बजे चार वनकर्मी हमारे घर पहुंचे। उन्होंने सफेद रंग की थैली घर में फेंकी। बंदूक की धौंस देकर हमें थैली घर से बाहर लाकर खोलने को कहा। इसे खोला तो इसमें किसी जानवर की खाल और सींग निकले। वनकर्मियों ने इसके फोटो खींचकर हमारे दस्तखत करवा लिए। उन्होंने धमकी दी कि कहीं इसकी शिकायत की तो करसन की तरह अंदर कर देंगे।

वन अमले ने बुधवार को करसन पटेल को गिरफ्तार किया था। परिजन के अनुसार वह पट्‌टे के आवेदन पर हस्ताक्षर कराने के लिए ग्राम पंचायत सीवल के सचिव के साथ खकनार के वन विभाग ऑफिस गया था। लेकिन यहां उसे फरार आरोपी बताकर गिरफ्तार कर लिया गया। कस्टडी में ही करसन घायल हो गया। हालांकि वन विभाग अफसर उसके द्वारा खुद को हथकड़ी से घायल करने की बात कह रहे हैं। वन विभाग ने कुछ महीने पहले करसन पटेल के घर को भी अतिक्रमण बताकर हटाया था। इस दौरान करसन यहां मौजूद था। स्थानीय लोगों का कहना है करसन आरोपी था तो इस दौरान उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। गुरुवार करसन को जेल भेज दिया गया। जेल रिकार्ड में उसकी गिरफ्तारी वन अपराध 5009/20 के तहत दर्ज है। जबकि यह क्रमांक खकनार पुलिस को दी गई सूचना में दर्ज नहीं है। इसको लेकर खकनार थाना टीआई महेश सुनैया ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। कौडिया कुंड के करीब 10-12 टपरों में 70 से अिधक लोग रहते हैं। करसन के परिजन ने एसपी को सौंपे गया पत्र भी विधायक राजेंद्र दादु को बताया। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने का आश्वासन दिया है। उनके साथ खकनार जनपद पंचायत अध्यक्ष रतिलाल चिल्लात्रे भी थे।

^जंगल बचाना हम सभी का उद्देश्य है। लेकिन शासन के निर्देशानुसार पट्‌टे के लिए आवेदन देना वहां के निवासियों का अधिकार है। अमानवीय और द्वेषपूर्ण कार्रवाई सहन नहीं की जाना चाहिए। मामले में वन विभाग को पोल खुलने का डर है। इसलिए इस प्रकार की बातें सामने रही हैं।^^ राजेंद्रदादु, विधाय