380 मामलों का निपटारा
8 साल बाद बाबा साहेब की प्रतिमा लगाने के लिए एकमत हुए लोग
शनिवार को लोक अदालत लगी। एेसा पहली बार हुआ अदालत एक छोटे से गांव नेह में पहुंची। यहां 8 साल से बाबा साहेब की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर दो पक्षों में विवाद चल रहा था। सुबह 9. 15 बजे जिला आनंद मोहन खरे न्यायाधीश गांव पहुंचे। नेर में 2006 से दो पक्षों में बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर सत्र न्यायालय में विवाद चल रहा था। वैचारिक मतभेद होने के कारण 8 साल से मामला सुलझ नहीं रहा था। समझाइश के बाद दोनों पक्षों ने प्रतिमा स्थापित करने पर सहमति दी। शनिवार को जिला न्यायाधीश आनंद मोहन खरे, अपर सत्र न्यायाधीश वैभव मंडलोई, सीजीएम गालीब रसूल, वकील दिनेश पोरावाला, एस मजीद, दीपक उमाले ने प्राथमिक स्कूल के बरामदे में दोनों पक्षों के सदस्यों को बुलाकर प्रतिमा स्थापना को लेकर चल रहे विवाद का निपटारा किया। दोनों पक्षों को समझाते हुए न्यायाधीश ने कहा बाबासाहेब आंबेडकर संविधान निर्माताओं में से एक है। इनकी प्रतिमा एकजूट होकर लगाएं। यह किसी नेता या पार्टी के व्यक्ति की प्रतिमा नहीं है। जिसकी किसी को आपत्ति होना चाहिए। कोर्ट में मुकदमे तो समाप्त हो जाते हैं, लेकिन दिल से विवाद कभी खत्म नहीं होते है। इसलिए मिलजुलकर रहें। हम लोग विवाद मिटाने के लिए आए हैं। प्रतिमा स्थापित करने के लिए स्थान आप लोग मिलकर तय करें। पंचायत द्वारा प्रस्ताव लेकर प्रतिमा स्थापना करें। न्यायाधीश ने लोगों से पूछा गांव की जनसंख्या कितनी है। लोगों ने बताया 870। इस पर न्यायाधीश ने कहा इतनी कम जनसंख्या होने के बाद भी आप झगड़ा करते हैं। प्रतिमा स्थल के बारे में किसी को आपत्ति नहीं है तो सरपंच को बुलाकर प्रस्ताव लेकर प्रतिमा की स्थापना करें। लोगों ने बताया सरपंच सुमनबाई गड़बड़ अभी मौजूद नहीं है। वह मजदूरी करने के लिए खेत में गई है। उपसरपंच और ग्राम पंचायत के सदस्यों ने प्रस्ताव लेकर विवाद को समाप्त करने की बात कही। इस दौरान दो पक्षों से संतोष तायड़े, रमेश फतरू सिरतुरे, सोपान पाटील, हरलाल पाटील, तुलसीराम पाटील, साहेबराव लालचंद सिरतुरे आदि मौजूद थे।
नेर गांव में प्राथमिक स्कूल के बरामदे में लगी लोक अदालत।
नेपानगर में शिविर के दौरान सुनवाई करते अधिकारी-कर्मचारी।