पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • गांधीजी से जो सीख पाई वही सबकुछ जीवन में काम आया

गांधीजी से जो सीख पाई वही सबकुछ जीवन में काम आया

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
महात्मागांधीजी की पोती तारा गांधी भट्टाचार्य की जुबां पर अपने बाबा के बिछुड़ जाने का दर्द आज भी झलकता है। वो मात्र 14 साल की थी जब महात्मा गांधीजी का देहांत हुआ था। छोटी उम्र में उन्होंने गांधीजी से जो सीख पाई, वही अपने जीवन में उतार लिया और आज वही उनके जीवन में काम रहा है। मंगलवार को कस्तूरबा वनवासी आश्रम पहुंची कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की राष्ट्रीय अध्यक्ष गांधीजी की पोती ने भास्कर से अपने अतीत और वर्तमान पर चर्चा की। उन्होंने कहा छोटी सी उम्र में उनके साथ रहने पर काम, सोच देश सेवा का भाव सीखा। यही आगे जीवन में काम आया। उनकी कमी खलती है। चौथी बार निवाली पहुंची तारा गांधी ने बच्चों से बीमारी से बचने के लिए सूती खादी कपड़ों को पहनने की सीख दी।

मंगलवार दोपहर करीब 2.15 बजे वह नगर के आश्रम में पहुंची। आश्रम की बालिकाओं ने आदिवासी वेशभूषा पहनकर नृत्य कर उनका स्वागत किया। आश्रम की बालिकाओं से चर्चा कर उनकी जानकारी ली। आश्रम के संचालक मंडल से उन्होंने आश्रम की सफाई शिक्षा की गुणवत्ता को बनाए रखने की बात कही। शाम 7 बजे वह इंदौर के लिए रवाना हो गई। वह इंदौर के कस्तूरबा आश्रम में चल रहे 4 दिनी सेमीनार में शामिल होने आई हैं।

तारा गांधी भट्‌टाचार्य के आगमन पर आदिवासी वेशभूषा में नृत्य कर स्वागत करती बालिकाएं।

मंगलवार दोपहर करीब 2.15 बजे आश्रम पहुंची तारा गांधी भट्‌टाचार्य।

माेदी के ग्रीन इंडिया क्लीन इंडिया अभियान से जुड़ने का आह्वान

उन्होंनेकहा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में साफ-सफाई हरियाली के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। मोदी के ग्रीन इंडिया क्लीन इंडिया अभियान से हर इंसान को जुड़ना चाहिए। हम जिस मिश्रित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। वो गलत है। हिंदी का प्रयोग लिखने की कम समझ से वर्तमान में भाषा का खतरा बना हुआ है। हम राष्ट्र की भाषा के साथ राज्य की भाषा में उलझे हुए हैं। कम्प्यूटर के उपयोग से लिखने का तरीका भी भूल रहे हैं।

निवाली को पहले से और सुंदर बताया

तारागांधी भट्‌टाचार्य ने कहा वह यहां चौथी बार रही हैं। इसके पहले 2012 में भगोरिया के दौरान यहां आई थीं। यहां की वेशभूषा संस्कृति ने उन्हें प्रभावित किया था। उन्होंने युवाओं बालिकाओं को उच्च शिक्षा सफाई के लिए हमेशा जागरुक रहने का संदेश दिया। हमारे घर या स्कूल में सुविधाघरों की स्