पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • बिना संगठन के अधिकार की लड़ाई नहीं लड़ी जाती

बिना संगठन के अधिकार की लड़ाई नहीं लड़ी जाती

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
संगठनमें शक्ति निहित है। बिना संगठन के अधिकार की लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है। समाज में विकलांगों को हित भावना से देखा जाता है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सुविधाएं की कमी के चलते स्वावलंबी नहीं बना जा सकता है। स्वावलंबी बनने में कई बाधक कारण है। उन्हें शिक्षित, निर्भीक होकर संगठन के माध्यम से दूर किया जा सकता है। इस प्रकार की जानकारी बीआरजीएफ भवन में एक दिनी सम्मिलित विकास जानकारी के तहत चल रही परियोजना पर विकलांग संगठन सदस्यों के प्रशिक्षण में सीबीआर समन्वयक सचिन पाटीदार ने दी।

विकासखंड पानसेमल में जर्मन लेप्रसी एंड टीबी टिलीफ एसोसिएशन के मार्गदर्शन में संचालित सेंट अगस्टिन सोशल सर्विस सोसायटी सेंधवा ने यह परियोजना 1 जनवरी से शुरू की गई। इस दौरान सीबीआर कार्यकर्ता मनोज यादव राजकुमार तामकिरे गांवों में पहुंचकर विकलांग सर्वे के साथ संगठन बनाकर सदस्य बना रहे हैं। सुबह 11 बजे शुरू हुए इस प्रथम प्रशिक्षण में मनोज यादव राजकुमार तामकिरे ने विकलांगों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास में गरीबी, कर्ज, स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, परिवार में बीमारियों का होना, शिक्षा, सुरक्षा सेवा, रोजगार, संसाधनों का अभाव, सरकारी योजना के क्रियान्वयन में भेदभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया शासन ने संचालित योजना सुविधाओं में विकलांगों के लिए सुरक्षा पेंशन, सहायक उपकरण, मनरेगा में 100 दिन का रोजगार, इंदिरा आवास रोजगार में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है लेकिन जनजाग्रति के अभाव में यह सुविधाओं का लाभ विकलांगों को पूर्णता नहीं मिल पा रहा है। तहसील मुख्यालय सहित रामपुरा, वासल्यापानी, जेतपुरा, भमराटा, खडकी, पन्नाली, भलखड़, रायचुल, राजपुरा, कानसूल, जाहूर, टेमला, देवधर, दिवडिया संगठन सदस्य शामिल हुए।

प्रशिक्षण शिविर में सदस्य शामिल हुए।