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लोक अदालत में 15 साल बाद पति-पत्नी में हुई सुलह

7 वर्ष पहले
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स्थानीय न्यायालय में भी शनिवार को लोक अदालत लगी। इसमें कई मामले समझौते से निपट गए। 15 साल से अलग-अलग रह रहे पति-प|ी में सुलह हुई।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में लोक अदालत सुबह 10.30 बजे शुरू हुई। एडीजे रमेश मावी, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरके पाटीदार, महेंद्रपालसिंह एचएल अलावा तथा अधिवक्ताओं ने सरस्वती पूजन कर शुरुआत की। शाम तक बिजली चोरी, नगर पालिका के अवैध नल कनेक्शन, बैंक ऋण, नगर पालिका के बकाया राशि, बिना अनुमति भवन निर्माण आदि मामलों में राशि जमा कर समझौता हुआ। इसके अलावा भी दीवानी, फौजदारी, बैंक सहित अन्य केस में सुलह हुई। केस लड़ने वालों को वकील, दलील और अपील से छुटकारा मिला।

साथरहने को हुए राजी

रामकटोरानिवासी कविता ने धवली निवासी पति सुनील पर घरेलू हिंसा भरण पोषण का केस दर्ज किया था। 14 नवंबर को न्यायालय ने साढ़े 4 हजार रुपए प्रतिमाह भरण पोषण खर्च देने के आदेश दिए। 15 दिसंबर को सुनील के खिलाफ वारंट जारी होने वाला था। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी महेंद्रपालसिंह ने सुनील की मां को बुलाकर समझाईश दी। इसके बाद दोनों पति-प|ी साथ रहने को राजी हो गए।

प्राइम इंफो

> 4 खंडपीठ स्थापित की गई थी लोक अदालत में

> लोक अदालत में 1390 मामलों का समझौते से निराकरण हुआ

> बिजली 683 कंपनी के मामले निपटे

> नगर पालिका के 351 मामलों में हुआ समझौता

> समझौता करने वालों को वन विभाग ने पौधे देकर उनकी देखभाल की शपथ दिलाई।

किस खंडपीठ में क्या हुआ

खंडपीठ 1 - एडीजेरमेश मावी के न्यायालय में 28 क्लेम प्रकरण में 67 लाख 90 हजार का प्रतिकार पक्षकारों को दिलाया गया। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दो पक्षकारों में समझौता कराकर साथ भेजा गया। बजावरी प्रकरण 5 और बिजली चोरी के 683 प्रकरणों में 67 लाख 49 हजार की वसूली हुई। 9 लाख 43 हजार कम्पाउंडिंग राशि वसूली गई।

खंडपीठ2 - न्यायिकमजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी आरके पाटीदार के न्यायालय में आईपीसी की 30, खात्मा प्रकरण 21, आबकारी विभाग के 12 प्रकरण निराकृत हुए। भरण पोषण घरेलू हिंसा के दो मामलों का निराकरण हुआ। खंडपीठ के अंतर्गत नगर पालिका के 351 प्रकरणों में 20 लाख 29 हजार 934 रुपए शुल्क वसूला गया। बैंकों के 58 मामलों में 19 लाख 66 हजार 605 तथा बीएसएनएल के 89 प्रकरणों में 1 लाख 13