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कृषि वैज्ञानिक भी नहीं बता पाए मिर्च पर कौन से वायरस ने किया हमला
मिर्चपर वायरस के अटैक से कृषि वैज्ञानिक भी हतप्रभ हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान (आईएआरआई) नई दिल्ली के कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.हसन गुरुवार को िकसानों के साथ खेतों में पहुंचे। अंजड़ क्षेत्र के किसानों ने उन्हें मिर्च के वायरस प्रभावित पौधे दिखाए। उनसेे पूछा आखिर ऐसा कौन सा वायरस है जिसने मिर्च को बढ़ने से पहले से खत्म कर दिया। यह आया कहां से है। पहले सवाल के जवाब में डॉ. हसन ने कहा वायरस कई प्रकार के होते हैं। यह कहना जल्दबाजी होगा कि यह कौन सा वायरस है। रही बात इसके आने की तो यह बीज, मिट्टी या हवा कहीं से भी सकता है। िकसान जयदेव पाटीदार, मुकेश जाट यहीं नहीं रुके, उन्होंने पूछा अब अटैक तो हो गया, बचाव के उपाय ही बता दो। डॉ. हसन ने कहा िकसी खरपतवार नाशक या कीटनाशक का उपयोग मन से करें। िकसी भी दवा का उपयोग पहले एक तय जगह पर ही करें। प्रयोग कारगर होने पर ही उसे पूरे खेत में डालें, दवा ज्यादा कारगर नहीं है तो उसे उपयोग करें। वे अपने साथ िमर्च के वायरस प्रभावित पौधे भी ले गए। उन्होंने कहा एआईआरआई में इस पर रिसर्च होगा। जो भी रिपोर्ट आएगी, उससे किसानों को अवगत कराया जाएगा।
किसान ले सकते हैं आईएआरआई से मदद
1800-11-8989
1801800-1551
011-16702784
इन नंबरों पर करें कॉल
िकसान खरीफ और रबी की फसलों के संबंध में आईएआरआई से मदद ले सकते हैं। उन्हें इसके लिए टोल फ्री नंबर पर फोन लगाना होगा।
{कलेक्टर से अनुमति के बाद ही कराई जा सकती है जांच
बड़वानी|वायरसप्रभावितमिर्च की डीएनए जांच के लिए किसान एक सप्ताह में आईएआरआई नई दिल्ली और बैंगलुरू जाएंगे। उन्नत किसान मदन मुलेवा ने बताया भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली में अनुसंधान होती है लेकिन इसके लिए कलेक्टर से अनुमति लेना जरूरी है। कलेक्टोरेट से अनुमति के बाद ही िकसी फसल को डीएनए की जांच के लिए भेजा या ले जाया जा सकता है। शुक्रवार को कलेक्टोरेट में अनुमति के लिए आवेदन दिया जाएगा। अनुमति मिलते ही िकसानों का एक दल अपने खर्च पर मिर्च के वायरस प्रभावित पौधे लेकर जाएंगे।
करीब40 फीसदी िमर्च प्रभावित-िमर्च बेल्टराजपुर और बड़वानी के किसानों की चिंता पैदावार को लेकर नहीं मिर्च की बढ़वार को लेकर बढ़ रही है। िकसान मंशाराम पंचौले, श्याम कछावा ने बताया िकसानों ने कोई सर्वे नहीं किया लेकिन मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 40 फीसदी मिर्च वायरस