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निरीक्षण: 84 दर्ज बच्चों को पढ़ाते हैं 7 शिक्षक, उपस्थिति 40 भी नहीं
जिलेमें कई स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है और शिक्षक कम। जिला मुख्यालय के प्राथमिक स्कूल क्रमांक 20 और 22 में 84 बच्चे दर्ज मिले और शिक्षक सात। उपस्थिति 40 की भी नहीं। कलेक्टर नीरज दुबे ने गुरुवार यहां निरीक्षण किया तो वे भी दंग रह गए। पहली में 7, दूसरी में 8, तीसरी में 20, चौथी में 21 और पांचवीं में 28 बच्चे दर्ज थे। गिनती के बच्चे और स्टाफ दोगुना। वे डीपीसी शैलेंद्र कानूडे से बोले, कितने लोग बैठकर पगार ले रहे हैं। आप क्या कर रहे हो। डीपीसी ने कहा, सर बच्चों के हिसाब से शिक्षक ज्यादा है कम करेंगे।
प्राथमिक स्कूल क्र. 10 में मैन्यू का भोजन नहीं दिखा। यहां भी 111 बच्चों पर सात शिक्षक ड्यूटी कर रहे हैं। डीपीसी ने प्रधानपाठक आरआर पाटीदार से जानकारी ली और पंचनामा बनाया। इसी दौरान एक शिक्षिका को घबराहट होने लगी उन्हें ऑटो से घर पहुंचाया।
ऐसेदिखी लापरवाही
उर्दूकन्या प्रावि क्र. 15 में बच्चे नहीं दिखे। शिक्षक अमाजुद्दीन शेख से पूछा बच्चे कहां है। जवाब मिला, बच्चे तो घर चले गए हैं। स्कूल सुबह लगता है। कलेक्टर ने फिर डीपीसी से पूछा, किसके निर्देश पर सुबह स्कूल लग रहा है। डीपीसी ने अनभिज्ञता जाहिर की। कक्षा में तिरंगे के चित्र में चक्र भी नहीं दिखा। उत्कृष्ट स्कूल प्राचार्य केसी भालेकर से स्कूल भवन ज्यादा बना देने पर पूछा तो उन्होंने मिशन की कार्रवाई बताया। मावि क्रमांक 4 में ताले लगे थे। कर्मचारी ने खोलने की कोशिश की, लेकिन नहीं खुले। उर्दू माध्यमिक 6 में भी बच्चे नहीं थे। कलेक्टर ने दर्ज संख्या पूछी तो डीपीसी फिर नहीं बता पाए। प्रधानपाठक नवाब खान ने कहा सर 3 शिक्षक हैं और 23 बच्चे। पिछले साल 25 वउसके पहले 28 थे। जबकि एक शिक्षक का ट्रांसफर हुआ है।
2स्कूलों का पंचनामा बनाया
^मैन्यूअनुसार भोजन नहीं बनाने पर दो स्कूलों का पंचनामा बनाया है। कई स्कूलों में शिक्षकों की संख्या अधिक है। जहां शिक्षकों की मांग है उन स्कूलों में शिक्षक भेजेंगे। सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग को पत्र लिखा है। -शैलेंद्र कानूड़े, डीपीसी