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मायलेन फार्मा को दवा बनाने के लिए नहीं मिल रहे युवा

5 वर्ष पहले
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मल्टीनेशनल फार्मा कंपनी मायलेन का पीथमपुर में प्रोजेक्ट का काम पूरा हो चुका है। कंपनी मार्च से उत्पादन शुरू करने जा रही है, लेकिन दवा बनाने के लिए उसे पर्याप्त कुशल युवा नहीं मिल रहे हैं। हाल ही में कंपनी ने एसजीएसआईटीएस के पूरे फार्मा बैच को ही अपने यहां नौकरी का ऑफर दिया है। कंपनी ने 2014 में यहां प्रोजेक्ट शुरू किया था। पीथमपुर में ही अजंता, एल्केम फार्मा जैसी बड़ी कंपनियां भी प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही हैं। इन्हें भी एक हजार से ज्यादा फार्मा के जानकार लगेंगे। पीथमपुर सेज में स्थापित कंपनियों में एक तिहाई फार्मा सेक्टर से ही हैं। सिप्ला, इप्का, सिम्बायोटेक जैसी कई कंपनियां यहां पहले से हैं। शेष|पेज 4 पर



सभी जगह इन कुशल कामगारों की तलाश की जा रही है। एकेवीएन एमडी कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि समिट के बाद कई फार्मा कंपनियां इंदौर और आसपास आ रही हैं, जिसमें हजारों की संख्या में रोजगार मिलेंगे। उद्योग की मांग के अनुसार युवाओं को तैयार करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को कहा है।

प्रदेश में हर साल निकलते हैं 5500 बी फार्मा छात्र
प्रदेश में बी फार्मा के 90 कॉलेज हैं, जहां हर साल 5500 युवा डिग्री लेकर बाहर आते हैं। फार्मा सेक्टर में शुरुआती पैकेज औसतन दो लाख रुपए प्रति साल का होता है। तीन साल काम करने के बाद यह बढ़कर पांच लाख से ज्यादा हो जाता है। शुरुआत में कम पैकेज के करण 50 फीसदी से ज्यादा युवा पीजी डिग्री लेने या एमबीए व अन्य कोर्स की ओर चले जाते हैं। इसके चलते प्रदेश में हर साल काफी कम युवा इस सेक्टर के लिए बचते हैं।

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